क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: राज्य के नागरिकों द्वारा जब प्रधानमंत्री से न्याय की फरियाद की जाती है तो उसे जन संवाद में ट्रांसफर कर दिया जाता है और जन संवाद उन शिकायतों को अस्पष्ट बताते हुए बंद कर देता है. पीएमओ में दर्ज परिवाद संख्या पीएमओपीजी/डी/2018/0183808 एवं पीएमओपीजी/डी/2018/0184074 को जन संवाद द्वारा अस्पष्ट बताते हुए जुलाई 2018 में बंद कर दिया गया था. इस मामले को लेकर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने जनसंवाद के ठेकेदार संजय जैन से उनके मोबाइल नंबर 94311-04710 पर संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया.

क्या है मामला

गौरतलब हो कि पहले पीएमओ में दर्ज शिकायतों पर सरकार के उप सचिव चन्द्र भूषण प्रसाद कार्रवाई करते थे. मगर फरवरी 2018 से सारी शिकायतों का निष्पादन जन संवाद द्वारा किया जा रहा है जो कि सरकार ने ठेका पर दे रखा है. जन संवाद के ठेका अधिकारियों/कर्मियों द्वारा मनमानी करते हुए पीएमओ में दर्ज सभी शिकायतों को बिना कार्रवाई किए ही बंद किया जा रहा है. शिकायतकर्ताओं को प्रधानमंत्री से न्याय मिलने की आस में महीनों इंतजार करना पड़ रहा है.

परेशानी क्यों

राज्य सरकार द्वारा समुचित व्यवस्था किये बिना ही जन संवाद को पीएमओ में दर्ज शिकायतों पर कार्रवाई करने का अधिकार दे दिया गया है. पीएमओ द्वारा सारी शिकायतों को जन संवाद के निदेशक रामलखन प्रसाद गुप्ता के पास भेजा जाता है, जिसपर महीनों तक संज्ञान नहीं लिया जाता है.

181 पर रिस्पांस नहीं

शिकायतकर्ता जब 181 पर कॉल कर स्थिति पता करते हैं तो जन संवाद के पास कोई जानकारी नहीं होती है. राज्य सरकार ने जन संवाद की पूरी व्यवस्था ऐसी बना दी है, जिसमें कोई पारदर्शिता ही नहीं रही. जन संवाद के वरीय अधिकारियों या नोडल अधिकारियों का विवरण तक सार्वजनिक नहीं किया गया है ताकि जरूरत पर उनसे संपर्क किया जा सके.

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जनसंवाद में ये मामले भी

मेरे पति की हत्या मामले में जनसंवाद में शिकायत दर्ज कराई गई थी. पर, अभी तक न्याय नहीं मिला. पुलिस भी नहीं सुन रही है.

मंजू देवी, हजारीबाग

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मेरे मकान व जमीन को अधिग्रहित कर लिया गया, जनसंवाद में शिकायत की लेकिन कोई मदद नहीं मिली.

प्रेमलता देवी, धनबाद