रणजी ट्रॉफी के समय काम आया स्‍कूप  
इंग्‍लैंड से ताल्‍लुक रखने वाले क्रिकेटर इकबाल ने यह शॉट सबसे पहले आज से 24 साल पहले मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी टूर्नामेंट में खेलते हुए इस्‍तेमाल किया था. इकबाल उस समय बहुत छोटे ब्रेक पर मुंबई में थे. वानखेड़े स्‍टेडियम में 1991-92 सीजन के दौरान मुंबई उस समय सौराष्‍ट्र के खिलाफ खेल रही थी, जब इकबाल ने अचानक बॉल को बाउंड्री के लिए पीछे खड़े विकेटकीपर के ऊपर से स्‍कूप करके सभी को चौंका दिया था.

कोच भी देखकर चौंक गए
हाल ही में भारत के क्रिकेट क्‍लब की ओर से दिए एक स्‍पेशल इंटरव्‍यू में इकबाल ने बताया कि उस समय पूर्व भारतीय टेस्‍ट क्रिकेटर हनुमंत सिंह उनके कोच थे. वह भी वह शॉट देखकर चौंक गए, लेकिन वो उस अविष्‍कार को देखकर काफी खुश्‍ा थे. उन्‍होंने उस शॉट के लिए इकबाल की पीठ थपथपाई और कहा, 'मियां क्‍या शॉट मारा.'    

ऐसे काम आया नया अविष्‍कार
इस स्‍कूप शॉट के अविष्‍कार का विचार इकबाल के मन में तब आया जब वह इंग्‍लैंड के क्रिकेट लीग के लिए मेहनत कर रहे थे. उस समय जब बॉल, बल्‍ले की ओर अच्‍छे से नहीं आ रही थी और ऐसे में मुश्किल हो गया था रन बना पाना, तो इकबाल ने सोचा कि बॉल को विकेटकीपर के ऊपर से स्‍कूप करना बुरा आइडिया नहीं होगा. उनका ये एक्‍सपेरिमेंट काम कर गया और इकबाल ने रणजी ट्राफी के दौरान बदलाव लाने में ज्‍यादा समय भी खराब नहीं किया.

मुंबई के लिए खेलने वाले इस क्रिकेटर ने इजाद किया था स्‍कूप शॉट  

वेंगसरकर ने की इकबाल की सराहना
पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने इकबाल के इस अविष्‍कार की काफी सराहना की. ये उस समय की बात है जब सबसे ज्‍यादा दबाव सीधे और जमीन की तरफ खेलने पर था. इकबाल ने वास्‍तव में वह स्‍कूप शॉट काफी अच्‍छा खेला था. वेंगसरकर कहते हैं कि आम तौर पर क्रिकेटर्स ऐसी खराब बॉल्‍स पर पीछे से जगह न मिलने पर जूझते रहते हैं, लेकिन इकबाल ने कोशिश की और बॉल को बिकेटकीपर के ऊपर से पार करके उसे कर दिखाया. यहां वेंगसरकर ने वेस्ट इंडीज के महान क्रिकेटर रोहन कनहाई और इंडियन ओपनर रामनाथ पारकर के 1950 और 1970 के स्विप शॉट को भी याद किया.      

इकबाल खुद को मानते हैं काफी सौभाग्‍यशाली
इकबाल, जिन्‍होंने मुंबई और असम के लिए 1986 से 1998 के बीच रणजी ट्रॉफी मैच खेला, खुद को बेहद सौभाग्‍यशाली मानते हैं कि भारत के कई महान क्रिकेटर्स ने उनकी पीठ थपथपाई. इकबाल कहते हैं कि यह उनके लिए काफी गर्व की बात थी मुंबई के लिए और उन 11 क्रिकेटर्स के बीच खेलना जिनमें संदीप पाटिल, रवि शास्‍त्री और संजय मांजरेकर जैसे महान क्रिकेटर मौजूद थे. बताते चलें कि उस समय 1993-94 में रणजी ट्रॉफी की यही टीम बिजेता घोषित की गई थी. इकबाल ने उस समय ऐसा महसूस किया कि T20 क्रिकेट, मुंबई के क्रिकेट को प्रभावित कर रहा है. इससे खेल के लंबे समय तक चलने वाले संस्करण को लेकर नौजवान क्रिकेटर्स दिशाभ्रमित हो रहे हैं.  
Courtesy By Mid-Day

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