-पहले बढ़ाकर भेज रहे कॉमर्शियल टैक्स फिर सेटलमेंट में 'खेल', टोटल बिल के 10 परसेंट के सेटलमेंट पर 'वसूली'

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यन्हृक्कक्त्र : कानपुर

नगर निगम अपनी आय को बढ़ाने के लिए जनता से 'सौदेबाजी' करने पर उतर आया है. सौदेबाजी का ये 'खेल' टैक्स के नाम पर किया जा रहा है. नगर निगम की इस कारगुजारी का खुलासा दैनिक जागरण आई नेक्स्ट कॉलिंग पर आए तमाम कानपुराइट्स की शिकायतों से हुआ है. लोगों ने डीजे आई नेक्स्ट को बताया कि किस तरह नगर निगम टैक्स बढ़ाकर भेज रही है और उसके बाद सेटलमेंट कराने के लिए बिल का 10 परसेंट की मांग की जा रही है.

.तो इसलिए हो रही है सौदेबाजी

कानपुर के पार्षदों और पब्लिक के विरोध के बावजूद 15 प्रतिशत तक का टैक्स निर्धारण किया गया था. इसमें बड़ी संख्या में वह लोग भी शामिल हैं, जिनका घर और मकान एक साथ है. लेकिन अभी भी करीब 50 हजार से ज्यादा लोग ऐसे हैं जिन्होंने अपना बिल जमा नहीं किया है. ऐसा नहीं की लोग बिल जमा नहीं करना चाहते, लेकिन आपत्ति के बाद टैक्स असेस्मेंट के नाम पर विभागीय कर्मचारी धड़ल्ले से अवैध वसूली कर रहे हैं. यही वजह है कि नगर निगम को कम वसूली की मार से गुजरना पड़ रहा है. क्योंकि नगर निगम की आय का बड़ा स्त्रोत टैक्स ही है, साल 2018-19 में हाउस टैक्स प्रस्तावित धनराशि 11,000 करोड़ रुपए रखा गया है. कानपुर कॉलिंग पर आई शिकायतों के बाद दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट ने पड़ताल की, इसमें बड़ा 'खेल' सामने आया.

कई गुना बढ़ाकर भेजा गया

टैक्स निर्धारण में अधिकारियों ने जानबूझकर मनमानी की. जिसके बाद बिल देखकर लोगों में हड़कंप मच गया. अधिकारियों ने सर्वे के दौरान फर्जी तरीके से घरों में बनी दुकानों को भी शामिल कर दिया गया और फर्जी तरीके से बिल जारी किए गए. ऐसे में बड़ी संख्या में आपत्तियां नगर निगम में आई. इन आपत्तियों को सही करवाने के लिए नगर निगम के अधिकारी पब्लिक से सेटलमेंट की डील कर रहे हैं. इसको सही करवाने के लिए 10 प्रतिशत की वसूली की जा रही है. वहीं शहर में ऐसे मकानों की भी तलाश की गई, जो हाउस टैक्स नहीं देते थे, उन्हें भी इस दायरे में शामिल किया गया.

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इसलिए बढ़ाया गया टैक्स

नगर निगम के मुताबिक 2008 में कर निर्धारण किया गया था, इसके बाद से कर रिवाइज्ड नहीं किया गया था. नियमों के मुताबिक हर 2 साल में टैक्स रिवाइज्ड किया जा सकता है. नगर निगम की ओर से यह फैसला इसलिए लिया गया है कि शहर में डेवलपमेंट के कार्यो पर खर्च कई गुना बढ़ गया है और आय कम है. वहीं 2008 के बाद कई रेजिडेंशियल बिल्डिंग का लैंड यूज भी बदल गया. ऐसे भवनों को चिन्हित कर नोटिस दिया गया था. इसमें अधिकारियों ने अपना 'खेल' दिखा दिया.

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इतने भवन किए गए थे चिन्हित

जोन-1 30,000

जोन-2 96,000

जोन-3 62,000

जोन-4 30,000

जोन-5 70,000

जोन-6 75,000

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इस प्रकार हुआ था कर निर्धारण

सम्पत्ति का विवरण नॉन रेजिडेंशियल भवनों की मासिक किराये की दर

1. कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स, दुकानें, बैंक कार्यालय, होटल और कोचिंग इंस्टीट्यूट (नियत दर का 5 गुना)

2. क्लीनिक, पॉलीक्लीनिक, नर्सिग होम, मेडिकल स्टोर आदि (नियत दर का 3 गुना)

3. स्पो‌र्ट्स कॉम्प्लेक्स, जिम, शारीरिक स्वास्थ्य केंद्र और फिल्म थियेटर (नियत दर का 2 गुना)

4. छात्रावास और टीचिंग इंस्टीट्यूट (जो अधिनियम की धारा 177 के खंड ग के अधीन आच्छादित नहीं हैं) (नियत दर के समान)

5. पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, डिपो और गोदाम आदि (नियत दर का 3 गुना)

6. मॉल्स, चार और फाइव स्टार होटल, पब, बार, वासगृह (जहां शराब परोसी जाती है) (नियत दर का 6 गुना)

7. सामुदायिक भवन, कल्याण मंडप, विवाह क्लब (नियत दर का 3 गुना)

8. औद्योगिक इकाईयां, सरकारी, अ‌र्द्धसरकारी और सार्वजनिक उपक्रम ऑफिस (नियत दर का 3 गुना)

9. टावर और होर्डिग वाले भवन (नियत दर का 4 गुना)

10. अन्य प्रकार के नॉन रेजिडेंशियल बिल्डिंग जो उपयुक्त श्रेणियों में उल्लेख नहीं किए गए हैं. (नियत दर का 3 गुना)

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मामला मेरे संज्ञान में नहीं है. टैक्स के संबंध में जो भी आपत्ति आती हैं, उनका निस्तारण नियमत: किया जाता है. अवैध वसूली की शिकायत कोई भी व्यक्ति आकर मुझसे कर सकता है.

-अमृत लाल बिंद, अपर नगर आयुक्त, नगर निगम.

केस-1

10 परसेंट दो, मामला निपटा दूंगा

काकादेव निवासी शिवेस सिंह ने बताया कि मेरा ऑफिस फजलगंज में है. पहले उसका कॉमर्शियल टैक्स सलाना 22,313 रुपए आता था. कुछ महीने पहले नोटिस मिला कि इसे बढ़ाकर 89,756 रुपए कर दिया गया. इसे ठीक कराने के लिए कई बार अधिकारियों के पास गया. आपत्ति के बाद असेसमेंट कराया, लेकिन उसके बाद भी स्थिति जस की तस है. कुछ दिन बाद जोनल ऑफिस में एक व्यक्ति ने 10 परसेंट में मामला खत्म कराने की बात कही.

केस-2

कोई भी असेसमेंट करने नहीं आया

बिरहाना रोड निवासी अमित ने बताया कि मेरे घर के दीवार से लगी दुकान है. जो मेरे घर में नहीं है. जबकि हाउस टैक्स में घर और दुकान को दर्शाया गया है. बिल बढ़ाकर भेज दिया गया. कई बार ऑफिस के चक्कर लगाए, लेकिन अभी तक कोई असेस्मेंट करने भी नहीं आया. बिल ठीक करने के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं. बिल ठीक होने के बाद ही हाउस टैक्स जमा करूंगा.