बर्खास्तगी और तबादले के बाद भी कर रहे ड्यूटी

कर्मचारियों के धरने के बहाने कर रहे राजनीति

Meerut. नगर निगम की कार्यप्रणाली को सुस्त करने और शहर को कूडे़ के ढेर पर बैठाने में नगर निगम के संविदा कर्मचारियों का बड़ा हाथ है. कर्मचारी काम से ज्यादा अपनी कुर्सी बचाने के लिए सालभर राजनीति में जुटे रहते हैं और इसी राजनीति का असर है कि निगम में दो दर्जन से अधिक कर्मचारी नौकरी से बर्खास्त और तबादले होने के बाद भी पिछले कई सालों से अपनी सीटों पर जमे हुए हैं. जब भी इन कर्मचारियों को कुर्सी से हटाने की मांग या बात होती है तो हड़ताल का ऐलान हो जाता है.

आंदोलन का सहारा

नगर निगम में कार्यरत करीब दो दर्जन से अधिक संविदा कर्मचारियों को कर्मचारियों एसोसिएशन द्वारा संरक्षण दिया जा रहा है. इस संरक्षण के चलते निगम में जब भी इन कर्मचारियों को पद से हटाने या जांच की बात होती है, आंदोलन या धरना शुरु कर दिया जाता है. 2015 में कर्मचारियों द्वारा ऐसे ही एक कर्मचारी की सेवा बहाल करने के लिए विरोध प्रदर्शन हुआ था. इसके बाद अब 2018 में एक बार फिर ऐसे ही एक कर्मचारी की सेवा समाप्ति के विरोध में पिछले सात दिनों से कर्मचारियों का धरना दिया जा रहा है.

भ्रष्टाचार छिपाने के लिए

अपर नगरायुक्त अली हसन कर्नी के मुताबिक निगम में कर्मचारी एसोसिएशन के नाम पर अलग-अलग संगठन चल रहे हैं जो भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए हंगामा, हड़ताल और प्रदर्शन का सहारा लेते हैं. इन्हीं के दवाब के चलते कई भ्रष्ट कर्मचारियों को बढ़ावा मिल रहा है.

केस स्टडी

नगर निगम के निर्माण विभाग के स्टोर में तैनात कर्मचारी को भ्रष्टाचार के आरोप में दो साल पहले निगम से निलंबित कर दिया गया था. लेकिन कर्मचारी हाईकोर्ट से स्टे लेकर दोबारा सीट पर आ गया. अब स्टे को खत्म हुए भी डेढ़ साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन दोबारा उसे सीट से हटाने की हिम्मत निगम नही दिखा पा रहा हैं.

किराया विभाग में बतौर लिपिक तैनात कर्मचारी को होटल अलकरीम और पाल होटल संपत्ति अवैध रुप से बेचने के मामले में निलंबित होने के बाद अंडर रिकवरी बहाल किया गया था. लेकिन यह रिकवरी आज तक नहीं हो सकी है और लिपिक अभी भी अपनी सीट पर कार्यरत है.

दो साल पहले निगम में हुई 23 नियुक्तियों को हाईकोर्ट ने अवैध ठहरा दिया था. इस मामले में निगम में संविदा कर्मचारी को निलंबित किया गया था, लेकिन निलंबन के बाद भी आज भी कर्मचारी नगर संघ में पदाधिकारी है.

हाउस टैक्स विभाग में गबन के मामले में 1991-92 में बर्खास्त किए गए संविदा कर्मचारी आज भी बिना किसी स्टे के विभाग में कार्यरत हैं. जब भी कर्मचारी के मामले में जांच की मांग उठती है तो निगम में धरना प्रदर्शन शुरु हो जाता है.

पिछले साल 196 कर्मचारियों की भर्ती हुई थी. जांच होने पर भर्ती निरस्त कर दी गई. इस मामले में भी कर्मचारी एसोसिएशन के वर्तमान पदाधिकारियों का नाम सामने आने पर जांच चल रही है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारी अपने पद पर कार्यरत हैं.