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Lucknow: बागपत जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले की विभागीय जांच में दोषी पाए गए जेल अधिकारियों व कर्मियों पर अब और भी कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। डीआईजी जेल, आगरा की जांच में मामले में पहले से सस्पेंड चल रहे जेलर व डिप्टी जेल समेत चार जेलकर्मियों के अलावा एक अन्य डिप्टी जेलर दोषी पाए गए हैं। अब इन पांचों आरोपियों को आरोपपत्र देकर जवाब तलब करने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि जवाब मिलने के बाद इन दोषी अधिकारियों व कर्मियों को बर्खास्तगी की कार्रवाई हो सकती है।

राठी पर नहीं था किसी का जोर
मुन्ना बजरंगी हत्याकांड के बाद शासन ने बागपत जिला जेल के जेलर उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव, हेड वार्डर अरजिंदर सिंह और वार्डर माधव कुमार को सस्पेंड कर दिया था। वारदात की विभागीय जांच डीआईजी जेल, आगरा को सौंपी गई थी। डीआईजी की जांच रिपोर्ट में सस्पेंड किये गए चारों जेल अधिकारी व कर्मियों के अलावा डिप्टी जेलर एसपी सिंह को भी दोषी पाया गया है। जांच में सामने आया कि मुन्ना की हत्या के आरोपी कुख्यात अपराधी सुनील राठी पर जेल अधिकारियों का कोई जोर नहीं था। पता चला कि राठी जेल के भीतर अपनी सत्ता चला रहा था। जेल के भीतर चेकिंग में भी कई स्तर पर गंभीर चूक पाई गई।

जेलर पर पहले भी लग चुका है आरोप

सूत्रों का कहना है कि जेलर उदय प्रताप की पूर्व में भी शिकायतें रही हैं। उन पर जेल में बंद डी-कंपनी के एक गुर्गे से अपने रिश्तेदार को ठेका दिलाने के लिए दबाव बनाने का आरोप भी लगा था। जांच के दौरान आरोपित जेल अधिकारी व कर्मी पिस्टल के सवाल पर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते रहे। कुछ बंदियों ने भी इन अधिकारियों द्वारा की जाने वाली अनियमितताएं की पोल खोली। जेल में कई मुलाकातियों की रजिस्टर पर इंट्री किए बिना सीधे मुलाकात कराए जाने की बात भी सामने आई है।

कर्मियों की गंभीर लापरवाही
इस मामले में जेल के एडीजी चंद्रप्रकाश का कहना है कि जांच रिपोर्ट में जेल अधिकारियों व कर्मियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। आरोपियों को आरोप पत्र दिये जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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