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Allahabad: मुन्ना बजरंगी का टेरर इलाहाबाद में भी चलता था. उसका इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के हॉस्टल्स से गहरा नाता रहा है. अलग बात है कि उसकी या उसके गैंग के सदस्यों की मौजूदगी की सूचना पर यहां छापा कई बार पड़ा लेकिन उसे कभी यहां से पकड़ा नहीं गया. वैसे यहां संरक्षण पाने वालों में अकेले मुन्ना का नाम नहीं है. कई अन्य अपराधी यहां शरण लेते रहे हैं और पुलिस छापे मारती रही है.

सुरक्षा के लिहाज से बेहतर स्पॉट

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी को पूरब का आक्सफोर्स कहा जाता था. यहां एडमिशन लेने के लिए पूर्वाचल के जिलों के साथ बिहार से छात्र आते थे. यूनिवर्सिटी के एक दर्जन से अधिक हॉस्टल हैं, जिसमें इन छात्रों को रहने के लिए जगह भी मिल जाती थी. अब भले ही थोड़ी निगरानी शुरू हो गयी हो लेकिन करीब एक दशक पहले तक यहां कौन आ-जा रहा है, इस पर नजर रखने वाला कोई नहीं था. इसी के चलते पूर्वाचल में आपराधिक घटना को अंजाम देकर तमाम अपराधी यहां शरण लेते थे.

पीसीबी हॉस्टल में था आना-जाना

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के एक पुरा छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 90 के दशक में अनुराग उर्फ अन्नू त्रिपाठी, रुपेश सिंह उर्फ मोनू सिंह और मुन्ना बजरंगी आपस में बेहद क्लोज थे और यहां आते थे. पुलिस ने गाजीपुर के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के बाद मुन्ना को पकड़ने के लिए इलाहाबाद में ही जाल बिछाया था. सूचना थी कि वह हॉस्टल में ही शरण लिये हुए है. अलग बात है कि लम्बे समय तक निगरानी के बाद भी कुछ हाथ नहीं आया. कई बार इसी चक्कर में पुलिस ने हॉस्टल्स पर रेड मारी लेकिन उसे सफलता नहीं मिली. अन्नू त्रिपाठी की वाराणसी में हत्या के बाद यह सिलसिला कम होने लगा. इस दौर तक मुन्ना का दायरा बाहुबली मुख्तार अंसारी का संरक्षण मिलने के बाद व्यापक हो चुका था.

नैनी सेंट्रल जेल में भी रहा था मुन्ना

माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी को नैनी सेंट्रल जेल में भी रखा गया था. 1998 में गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा कारणों के चलते मुन्ना को नैनी जेल में रखा गया था. यहीं से उसे पेशी के लिए वाराणसी कोर्ट ले जाया जाता था. वर्ष 2000 में नैनी जेल से वाराणसी ले जाते समय उसे भदोही-वाराणसी के बीच स्थित एक ढाबे पर पकड़ा गया था. पता चला कि पुलिसवालों को पटाकर उसने वाहन वहीं रोकवा लिया था. यहां मुन्ना कुछ कोयला माफियाओं के साथ बात कर रहा था. संयोग से इसकी भनक पुलिस को लग गई तो छापा मारकर उसे पकड़ा गया था. इस मामले में पुलिसवालों के साथ मुन्ना पर भी कार्रवाई हुई थी.

गुंडा टैक्स के लिए आती थी कॉल!

ऑफिशियली इसकी पुष्टि नहीं है लेकिन सूत्रों का कहना था कि मुन्ना के नाम पर गुंडा टैक्स इलाहाबाद में भी वसूला जाता था. गुंडा टैक्स मांगे जाने के मामले आम तौर पर या तो लाइम लाइट में नहीं आते या फिर काम हो जाने पर दबा दिये जाते हैं. इसी के चलते इस पर खुलकर कभी कुछ सामने नहीं आया. सूत्रों का कहना है कि यहां के डॉक्टर्स और कांट्रैक्टर्स मुन्ना गैंग के निशाने पर थे. इनसे सीधे पैसे की मांग की जाती थी. कभी मदद के नाम पर तो कभी सीधे-सीधे पैसे की डिमांड और न पहुंचाने पर काम तमाम कर देने की धमकी. 2016 में माफिया सरगना मुन्ना बजरंगी का सबसे खास शार्प शूटर धर्मेन्द्र सिंह उर्फ रिंकू को एसटीएफ ने औद्योगिक थाना क्षेत्र के पास से गिरफ्तार किया था. रिंकू प्रयाग घाट रेलवे स्टेशन पर ठेकेदारी में कमीशन को लेकर कल्लू पाण्डेय और सूरज पाण्डेय की हत्या में वांक्षित चल रहा था. हत्याकांड की जांच में जुटी एसटीएफ को उसकी तलाश थी. रिंकू पर पचास हजार का इनाम भी था.

इलाहाबाद में हुआ था मुन्ना के शूटर का एनकाउंटर

वर्ष 2011 में मुन्ना बजरंगी गैंग के शातिर शार्प शूटर और उसका दाहिना हाथ कहे जाने वाले बच्चा यादव को एसटीएफ की टीम ने एनकाउंटर में मार गिराया था. तब पुलिस ने जो स्टोरी बतायी थी उसके मुताबिक वह किसी की हत्या की सुपारी लेने के लिए शहर में आया था. उसके शहर में आने की सूचना पर एसटीएफ की टीम ने नए यमुना पुल के पास अरैल रोड पर घेर लिया. दोनों तरफ से हुई फायरिंग के दौरान बच्चा यादव मारा गया. बच्चा पर सिपाही की हत्या समेत करीब आधा दर्जन हत्या के अपराधिक मामले चल रहे थे. वह 2008 से फरार चल रह था.