-नशा के लिए बेच दी थी 68 बीघा जमीन, 12 बीघा बेचने की थी तैयारी

-दिल्ली से लौटे छोटे बेटे ने बड़े भाई के साथ मिलकर पिता को मारी गोली

BAREILLY: तीन दिन पहले भुता के केसरपुर गांव में हुई रामदेव शर्मा की हत्या से पुलिस ने पर्दा उठा दिया है. रामदेव की हत्या उसके ही तमंचे से बेटों ने मिलकर की थी. बेटों की माने तो रामदेव ने अपनी अय्याशी के लिए घर की 68 बीघा जमीन बेच चुका था. इसके बाद भी वह ढाई लाख रुपए फिर कर्ज लेकर बची 12 बीघा जमीन को बेचना चाह रहा था. जिसके कारण पूरा परिवार रामदेव से नफरत करता था. 12 बीघा जमीन बचाने को लेकर बेटों ने घटना को अंजाम दिया था.

चारपाई पर सोते समय मारी गोली

बता दें कि केसरपुर निवासी रामदेव शर्मा की हत्या घर के बाहर ही चारपाई पर सोते समय गोली मारकर की गई थी. गांव में देवी जागरण होने के कारण गोली की आवाज परिजनों को नहीं सुनाई पड़ी थी. सुबह परिजनों ने लहूलुहान शव देखा तो पुलिस को सूचना दी थी. जिसके बाद पत्नी की तहरीर पर अज्ञात हत्यारे के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. पुलिस मामले की जांच कर रही थी कि इसी दौरान सुराग लगा कि रामदेव की हत्या में उसके बेटों की भूमिका संदिग्ध है. जिसके बाद पुलिस ने बेटों से पूछताछ की तो वह टूट गए.

परिवार के दिल में भरी थी नफरत

पुलिस ने हत्या में बड़े बेटे तुलसी दास शर्मा व छोटे बेटे अंकित शर्मा को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त तमंचा बरामद कर लिया है. एसपी देहात द्वारा किए गए खुलासे के दौरान दोनों ने बताया कि पिता ने शुरू से ही अय्याशी में पूरी जमीन जायदाद बेच डाली. इतना ही नहीं बचपन से वह मां को पिता द्वारा जल्लाद की तरह पीटते देखा है. पिता ने उन्हें कभी प्यार नहीं किया सिर्फ मारते पीटते थे. उनके दिल में पिता के लिए नफरत भरी थी लेकिन कभी मारने के लिए नहीं सोचा.

12 बीघा जमीन पर भी ले लिया कर्ज

रामदेव के पास 80 बीघा पैत्रिक जमीन थी. उसने स्मैक व शराब और अपनी अय्याशी पूरी करने के लिए धीरे-धीरे कर 68 बीघा जमीन बेच दी. 12 बीघा जमीन बची थी. उसके पिता ने फिर से ढाई लाख रुपए कर्ज लिया और अब वह 12 बीघा जमीन बेचने के फिराक में था.

पहले बेचते थे अनाज

प्रेसवार्ता के दौरान दोनों बेटे बिलख पड़े. बताया कि उनके पास 80 बीघा जमीन थी. जिसपर भरपूर अनाज पैदा होता था. खाने की कभी कमी नहीं पड़ी थी. इतना अनाज वह बेचते थे कि जिससे घर का पूरा साल भर का खर्च आराम से चलता था. मगर पिता ने लगभग पूरी जमीन बेच थी. जिसके कारण अब उन्हें अनाज उधार लेकर खाना पड़ता था. बड़े बेटे तुलसी दास की शादी भी हो चुकी है. घर का खर्च चलाने के लिए तुलसी उत्तराखंड के सिटकुल में सत्यम ऑटो में क्वालिटी चेकर की नौकरी तो छोटा बेटा पढाई छोड़कर दिल्ली में नौकरी करने लगा था. घर का खर्च चलाने के लिए भैंस पाली थी. जिसका दूध उनकी मां बेचती थी. उसके बाद भी पिता मां को पीटकर दूध के रुपये भी छीनकर शराब पी जाता था.

जागरण के समय की वारदात

दोनो भाई नौकरी कर दस दिन पहले घर आए थे. उन्हें ढाई लाख कर्ज व फिर जमीन बेचने की तैयारी की बात पता चली तो उनका सब्र जवाब दे गया. जिसके बाद छोटे बेटे ने ही बड़े भाई से पिता की हत्या कर जमीन बचाने की बात कही. उन्होंने हत्या का प्लान बनाया और जागरण वाले दिन को चुना. इसके बाद उन्होंने पिता के ही तमंचे से उनकी हत्या के लिए चुना और घटना को अंजाम दिया.