- प्रधान चुनाव में कई गांवों में बहेगा अभी खून

- प्रशासन अति संवेदनशील प्लस गांवों को चिह्नित करने में जुटा

- चुनावों को शांतिपूर्ण कराने में कोई नहीं है प्रशासन के पास प्लानिंग

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sharma.saurabh@inext.co.in

Meerut : पहले खिर्वा जलालपुर, फिर रासना और अब तोफापुर. जिला पंचायत के दौरान और ग्राम प्रधान चुनाव होने से पहले प्रधानी हथियाने को लेकर तीन मौतें हो चुकी हैं. सबसे बड़ी तो ये है ये बात प्रशासन और पुलिस भी मान चुका है कि आने वाले ग्राम प्रधान के चुनाव उनके लिए और भी चुनौतीपूर्ण होने जा रहे हैं. ऐसे में जो अभी तक हुआ है वो किसी फिल्म के ट्रेलर की तरह है पूरी फिल्म अभी बाकी है. वहीं पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सिर्फ दर्शक बनने के अलावा कुछ नहीं कर रहे हैं. आगे भी कुछ इसी तरह का सिलसिला होने जा रहा है.

ताबड़तोड़ वारदातों से दहला मेरठ

ग्राम प्रधान के चुनावों से पहले तीन गांवों में जो हुआ वो सिर्फ एक बानगी भर था. मेरठ में ऐसे दर्जनों गांव जहां प्रधान पद को लेकर काफी संघर्ष के साथ काफी खून बहने के आसार हैं. क्योंकि कई गांव ऐसे हैं पिछले चुनावों में हाई सेंसटिव की श्रेणी में आते रहे. प्रधान के चुनावों में वहां पूरी तरह से खून-खराबा होने की उम्मीद है, जिनको लेकर पुलिस से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक सभी चिंतित हैं.

इन गांवों को लेकर काफी चिंता

एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि ऐसे गांवों की लिस्ट बनाई जा रही है, जहां बवाल और प्रधान पद को लेकर खून होने की पूरी संभावना है. करनावल, भदौड़ा, खिर्वा जलालपुर, र्राधना, रासना, बढला, बाफर, पहाड़पुर, करीम नगर, भंडोरा, कुंडा, पिनाई, रामनगर, छुछाई, नासरपुर, दांदुपुर, मोरना, डिंडावली, किशोरपुर, पुट्ठी, झझोकर आदि ऐसे गांव हैं, जहां पर खूनी संघर्ष होने के पूरे आसार हैं.

नहीं है कोई तैयारी

अगर बात तैयारी की करें तो जिला प्रशासन और पुलिस के पास ऐसा कोई मास्टर प्लान नहीं जिससे इन वारदातों और खूनी संघर्ष को रोका जा सके. भले पुलिस और प्रशासन कुछ भी कहे. ताज्जुब की बात तो ये है प्रशासन और पुलिस रासना और खिर्वा जलालपुर जैसे कांड से भी कोई सबक लेने को तैयार नहीं है. अगर सबक लिया होता तो तोफापुर कांड न होता या फिर उसके आरोपी अभी तक गिरफ्तार हो चुके होते, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है.

ये बात सही है कि ग्राम प्रधान चुनाव हमारे लिए काफी चुनौती पूर्ण रहेंगे, लेकिन बूथ कैपचरिंग जैसी वारदातें ऐसे चुनावों में नहीं होती हैं. क्योंकि इन चुनावों में एक ही गली के चार कैंडीडेट होते हैं. फिर भी मर्डर और लॉ एंड ऑर्डर को ठीक करने की पूरी कोशिश की जाएगी. जैसा कि हमने जिला पंचायत के चुनावों में रखने की कोशिश की थी.

- पंकज यादव, डीएम

हमारे पास पर्याप्त फोर्स हैं. जहां आरएएफ लगाने की जरुरत होगी वहां लगाई जाएगी. जहां पीएसी की जरुरत होगी लगाई जाएगी. हम अपने लेवल पर पूरी तरह से तैयार हैं. किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी.

- पीके तिवारी, एसपी ट्रैफिक एवं नोडल आफीसर पंचायत चुनाव