-हॉस्पिटल की अव्यवस्थाओं को जगजाहिर नहीं होने देना चाहते हैं डॉक्टर्स

-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल को छोड़ कोई भी सरकारी-प्राइवेट हॉस्पिटल नहीं जुड़ा

BAREILLY :

स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए उस पर निगरानी डॉक्टर्स को रास न आई. यही वजह है कि सरकारी हॉस्पिटल से लेकर एक भी प्राइवेट हॉस्पिटल मेरा अस्पताल वेब पोर्टल से खुद को नहीं जोड़ सके. योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोच की उपज होने के चलते डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रिेशन ने खुद को जोड़ तो लिया, लेकिन इसके जन प्रचार कराने से कन्नी काट ली. नतीजा यह है कि वेब पोर्टल के बारे में पब्लिक का वाकिफ होना तो दूर की बात हॉस्पिटल के कर्मचारी ही अनजान हैं.

मरीजों-तीमारदारों को देनी थी फीडबैक

वेब पोर्टल से सभी सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल को जोड़ा जाना है. ताकि, इन हॉस्पिटल में इलाज के लिए जाने वाले मरीज और उनके तीमारदार हॉस्पिटल की अच्छाइयों और खामियों का फीडबैक सरकार को दे सकें. खामियों को सुधारने के लिए सरकार ने यह तरकीब निकाली है, जिसमें शिकायतकर्ता का नाम-पता गोपनीय रखा जाना था. डॉक्टर्स इस वेबपोर्टल से जुड़ने को आफत मोल लेने जैसा समझ रहे हैं.

दो माह पहले जुड़े

मेरा अस्पताल एप को लॉन्च हुए डेढ़ साल हो गए हैं. हैरानी की बात है कि डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल को इस एप से सीएमओ और सीएमएस दो माह पहले ही जोड़ने की जहमत उठा सके. सरकार के दबाव के आगे इन अफसरों ने एक हॉस्पिटल को तो लिंक कर लिया, लेकिन बरेली का एक भी सीएचसी और पीएचसी इस वेब पोर्टल से नहीं जुड़ सका. इसकी वजह साफ है कि इन अस्पतालों में अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार की पोल खुल जाएगी. यह लालफीताशाही के भ्रष्टाचार तंत्र का एक बड़ा उदाहरण भ्ाी है.

ऐसे काम करेगा पोर्टल

-हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों का रजिस्ट्रेशन काउंटर, ओपीडी व एडमिट मरीजों का मोबाइल नम्बर लिया जाएगा.

-इन नंबरों के जरिए मरीजों और तीमारदारों से हॉस्पिटल में स्वास्थ्य सुविधाओं का फीडबैक मांगा जाएगा.

- इसमें पहला ऑप्शन बहुत संतुष्ट, दूसरा ऑप्शन असंतुष्ट और तीसरा ऑप्शन संतोषजनक है. - इन तीनों में से एक ऑप्शन पर रिप्लाई करते ही आपका फीडबैक दर्ज हो जाएगा.

पीएम ऑफिस से निगरानी

'माई हॉस्पिटल' पीएम मोदी ने लांच किया है. इसकी निगरानी भी पीएमओ आफिस से की जाती है. जिसमें तमाम डिस्ट्रिक्ट वाइज हॉस्पिटल की फीड बैक मांगी जाती है. इसी फीड बैक के आधार पर हॉस्पिटल्स को गे्रडिंग दी जाएगी. अच्छा काम करने वाले हॉस्पिटल को पीएमओ की तरफ से सम्मानित किया जाएगा, और उसमें सुविधाएं बढ़ाने के लिए संतुति कर वार्षिक फंड भी बढ़ाया जाएगा. वहीं खराब फीड बैक वाले हॉस्पिटल को चिह्नित कर उनको सुधारा जाएगा. ताकि हॉस्पिटल आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सके. खराब फीड बैक वाले हॉस्पिटल के खराब फीड बैक के कारणों को भी खोजा जाएगा. इसके लिए एक्सपर्ट भी जांच करेंगे.

देख सकते हैं एक्शन

हॉस्पिटल की शिकायत करने वाला कोई भी मरीज या तीमारदार शिकायत करने के बाद मोबाइल में फीड बैक के लिए देख सकता है. जिसमें उसे यह जानकारी भी मिलेगी कि उसने जो शिकायत की है उस पर कोई एक्शन लिया गया है या नहीं. एक्शन के बाद क्या समस्या का समाधान किया गया है. इस बात की भी जानकारी अपलोड की जाएगी. ताकि शिकायत करने वाले को भी संतुष्ट किया जा सके.

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अभी दो माह पहले ही एप के बारे में जानकारी दी गई थी. जिसमें डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल को जोड़ दिया गया है. लेकिन अभी अन्य सरकारी हॉस्पिटल को नहीं जोड़ा जा सका, जल्द ही अन्य को जोड़ा जाएगा. इसको आयुष्मान भारत के लांच होने के साथ इसको प्रमोट किया जाएगा. इसमें आयुष्मान मित्र भी जोड़े जाएंगे.

केएस गुप्ता, सीएमएस डिस्ट्रिक्ट हॉस्टिपल

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डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में कोई सुनने वाला है और दो-दो घंटे बाद रजिस्ट्रेशन और दवा काउंटर पर नम्बर आता है. वेब पोर्टल के लिए मोबाइल नम्बर ही नहीं लिया जा रहा है तो अव्यवस्था की शिकायत कौन करेगा.

अरविन्द

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हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए. इसके लिए हॉस्पिटल में कोई फ्लैक्स आदि लगावाया जाना चाहिए. ताकि हर कोई इसे जान सके. इसके लिए अवेयर भी किया जाना चाहिए.

त्रिभुवन