इस वर्ष नाग पंचमी का त्योहार 15 अगस्त को मनाया जा रहा है। इस बार नाग पंचमी हस्त नक्षत्र और साध्य योग में पड़ रही है, जो कि अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।

पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से सांयकाल 04 बजकर 13 मिनट तक है। इस दिन जो लोग नाग पूजा और काल सर्प योग की साधना आदि करते हैं वे अपनी पूजा प्रातः 11 बजकर 48 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 32 मिनट के मध्य कर लें। ये सर्प पूजा का सबसे शुभ काल है।

जहां सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को उत्तर भारत में नाग पूजा की जाती है, वहीं दक्षिण भारत में ऐसा ही पर्व कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। हिन्दू धर्म में नाग पंचमी का अत्यंत महत्व माना जाता है।

एक मान्यता के अनुसार इस दिन सर्पों के 12 स्वरूपों की पूजा की जाती है और दूध चढ़ाया जाता है। भगवान शिव को सर्प अत्यंत प्रिय हैं इसीलिए उनके प्रिय माह सावन में नाग पंचमी का त्योहार आता है, जिसे श्रद्धापूर्वक विधि विधान से मनाने पर भोलेनाथ प्रसन्न हो कर अपनी कृपा बरसाते हैं।

नाग पंचमी की 3 पौराणिक कथाएं

नाग पंचमी पर है विशेष संयोग,इन मंत्रों से पूजा करने पर कालसर्प दोष से मिलेगी मुक्ति

भविष्य पुराण के अनुसार सावन महीने की पंचमी नाग देवता को समर्पित है, यही कारण है कि इसे नागपंचमी कहते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार सावन महीने की शुक्ल पक्ष पंचमी को भगवान श्री कृष्ण ने वृदांवन में नाग को हराकर लोगों का जीवन बचा लिया था। श्री कृष्ण भगवान ने सांप के फन पर नृत्य किया, जिसके बाद वह नथैया कहलाये।

एक और पौराणिक कथा भी है जिसके अनुसार इस दिन सृष्टि रचयिता ब्रह्मा जी ने अपनी कृपा से शेषनाग को अलंकृत किया था। पृथ्वी का भार धारण करने के बाद लोगों ने नाग देवता की पूजा करनी शुरू कर दी, तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

नागपंचमी पूजन और सर्पदोष से मुक्ति

मान्यताओं के अनुसार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को नागपंचमी के दिन व्रत भी रखा जाता है, व्रत के बारे में गरूड़ पुराण में लिखा है कि व्रत रखने वाले को मिट्टी या आटे के सांप बनाकर उन्हें अलग-अलग रंगों से सजाना चाहिए, सजाने के बाद फूल, खीर, दूध, दीप आदि से उनकी पूजा करें, क्योंकि नाग देवता को पंचम तिथि का स्वामी माना जाता है पूजा के बाद भुने हुये चने और जौ को प्रसाद के रूप में बांट दें।

जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष है उन लोगों को इस दिन नाग देवता की पूजा करनी चाहिए, इस दिन पूजा करने से कुंडली का यह दोष समाप्त होता है।

नाग पंचमी व्रत विधान

नाग पंचमी पर है विशेष संयोग,इन मंत्रों से पूजा करने पर कालसर्प दोष से मिलेगी मुक्ति

इस दिन नाग देवता के मंदिर में श्री फल चढ़ाया जाता है। ‘ॐ कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा’ श्लोक का उच्चारण कर सर्प का जहर उतारा जाता है, और सर्प के प्रकोप से बचने के लिए नाग पंचमी की पूजा की जाती है।

नागपंचमी पर नाग पूजन के मंत्र

मंत्र 1– ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नाग: प्रचोदयात्..

मंत्र 2– ‘सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले. ये च हेलिमरीचिस्था ये न्तरे दिवि संस्थिता:.. ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:. ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:..’

अर्थात्– संपूर्ण आकाश, पृथ्वी, स्वर्ग, सरोवर-तालाबों, नल-कूप, सूर्य किरणें आदि जहां-जहां भी नाग देवता विराजमान हैं। वे सभी हमारे दुखों को दूर कर हमें सुख-शांतिपूर्वक जीवन दें। उन सभी को हमारी ओर से बारम्बार प्रणाम है।

ज्‍योतिषाचार्य पंडित श्रीपति त्रिपाठी

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