- नगर निगम स्पॉट वेरिफिकेशन कर बनाएगा हॉस्टल्स की लिस्ट, जुटाएंगे पूरा डेटा

- देवरिया में संरक्षण गृह कांड के बाद में सुरक्षा के मद्देनजर शहर में होगा सघन सर्वे

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VARANASI

देवरिया में संरक्षण गृह कांड सामने आने के बाद डिस्ट्रिक्ट में प्रशासनिक सक्रियता बढ़ गई है. शासन के निर्देश पर शेल्टर होम्स की जांच चल ही रही है, लेकिन अब गली-कूचों में अवैध रूप से खुले ग‌र्ल्स हॉस्टल की 'कुंडली' भी खंगाली जाएगी. नगर निगम हॉस्टल्स का सघन सर्वे कर स्पॉट वेरिफिकेशन करेगा. हॉस्टल चलाने वालों से यहां रहने वाली ग‌र्ल्स की पूरी डिटेल ली जाएगी. इसका पूरा डेटा जुटाकर डिस्ट्रिक एडमिनिस्ट्रेशन को भेजा जाएगा.

हॉस्टल्स का रिकॉर्ड तक नहीं

दरअसल, शहर के कुछ एरिया में भवन स्वामियों ने मकान में ब्वॉयज और ग‌र्ल्स हॉस्टल्स बनवा लिया है. इससे वे मोटी कमाई कर रहे हैं. चुनिंदा हॉस्टल्स को छोड़ दिया जाये तो बड़ी संख्या में हॉस्टल्स ऐसे हैं, जिनका रिकार्ड किसी विभाग के पास नहीं है. पुलिस भी हॉस्टलर्स का वेरिफिकेशन करवाने की जहमत नहीं उठाती. ऐसे भवन स्वामी नगर निगम को टैक्स तो घरेलू दर के हिसाब से देते हैं, लेकिन यूज कामर्शियल करते हैं.

चल रहा सर्वे, बढ़ेगा काम

पिछले महीने से नगर निगम ऐसे हॉस्टल्स का जोनवार सर्वे करवा रहा है, ताकि नए असेसमेंट के हिसाब से कामर्शियल टैक्स लिया जा सके. इस सर्वे में अब स्पॉट वेरिफिकेशन किया जाएगा. साथ ही रहने वाली ग‌र्ल्स का पूरा ब्योरा भी जुटाया जाएगा, ताकि हॉस्टल्स का रजिस्ट्रेशन, न्यू असेसमेंट व रहने वाली ग‌र्ल्स का पूरा डेटा विभागों के पास मौजूद रहे.

इन एरिया में ज्यादा हॉस्टल्स

सिटी के लंका, सुंदरपुर, सिगरा, कस्तूरबा नगर, नगवां, गुरुबाग, कोनिया, जगतगंज, रामकटोरा, चौकाघाट समेत दो दर्जन एरिया में बड़ी संख्या में ग‌र्ल्स हॉस्टल्स संचालित हो रहे हैं. इसमें भारी तादाद में स्टूडेंट्स व वर्किंग वूमेन रहती हैं. यहां रहने-खाने के एवज में प्रति महीने एक निश्चित धनराशि हॉस्टल संचालक को देनी हाेती है.

एक नजर

- 60 हॉस्टल महज नगर निगम में रजिस्टर्ड

- 150 से ज्यादा हॉस्टल मिले अब तक सर्वे में

- 03 गुना ज्यादा देना होता है घरेलू दर के हिसाब से टैक्स

- 25 दिन से चल रहा न्यू असेसमेंट अभियान

- 03 बिन्दुओं पर फोकस रहेगा अभियान में

अवैध रूप से चल रहे हॉस्टल्स पर शिकंजा कसा जाएगा. रजिस्ट्रेशन के साथ ही स्पॉट वेरिफिकेशन भी किया जाएगा, ताकि इनका रिकॉर्ड हमेशा मौजूद रहे.

अजय कुमार सिंह, प्रभारी नगर आयुक्त