- नगर निगम व जलकल में पिछले महीने करीब साढ़े पांच हजार आयीं शिकायतें

- महज 20 से 50 फीसदी मामलों का ही हो पाता है निस्तारण, बाकी हैं पेंडिंग

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VARANASI

एक तरफ गंगा, वरुणा और अस्सी नदियां उफान पर हैं. वहीं नगर निगम और जलकल में भी शिकायतों की 'बाढ़' सी आ गई है. सीवर से लेकर सफाई तक के लिए लोग डेली बड़ी संख्या में कम्प्लेंट दर्ज करा रहे हैं. नगर निगम की हेल्पलाइन, आईजीआरएस और एप और जलकल विभाग में पिछले महीने शिकायतों का आंकड़ा पांच हजार को पार कर गया. सफाई की शिकायतों को छोड़ दें तो अन्य में 20 से 50 फीसदी मामलों का ही निस्तारण हो पा रहा है.

सीवर व सफाई की शिकायतें ज्यादा

नगर निगम और जलकल की हेल्पलाइन के आंकड़ों पर गौर करें तो सबसे ज्यादा मोहल्लों की सफाई व्यवस्था और सीवर से जुड़ी प्रॉब्लम सामने आ रही हैं. इसके बाद पानी न आने, घरों में गंदा पानी आने, आवारा पशुओं व कुत्तों का आतंक, गलियों व रोड्स की बदहाल स्थिति, पार्को में बुनियादी सुविधाएं मुहैया न होने जैसी शिकायतें पब्लिक दर्ज करा रही है.

नई व्यवस्था शुरू, समस्या बरकरार

सीवर सफाई के लिए नगर निगम ने एक बार फिर पुरानी व्यवस्था को लागू किया है. दरअसल, मई से काम कर रही लग्जरा इंटरप्राइजेज सीवर की सफाई में असफल हो गई. जिसके चलते फिर से सफाई का जिम्मा जलकल के ठेकेदारों को देना पड़ा. इस महीने के शुरू से मशीनों से मेन लाइन की और मैनपॉवर से ब्रांच लाइन की सफाई चल रही है, लेकिन शिकायतें कम नहीं हुई हैं.

सफाईकर्मियों की मनमानी

नगर निगम के सफाईकर्मियों की मनमानी की भी शिकायतें खासी संख्या में सामने आई हैं. दो महीने पहले ऐसी ही शिकायत पर नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने चार सफाईकर्मियों को सस्पेंड कर दिया था. जबकि दो सफाई निरीक्षकों पर भी कार्रवाई की थी. बावजूद इसके मोहल्लों में तैनात सफाईकर्मियों की शिकायतें कम नहीं हो रही हैं.

इन शिकायतों की भरमार

- सफाई

- सीवर

- वाटर सप्लाई प्रॉब्लम

- छुट्टा व आवारा पशु

- गलियों व रोड्स की बदहाली

- कुत्तों का आतंक

- जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के मामले

- भवन नामांतरण समय सीमा में न होना

- पार्को की बदहाल स्थिति

- रोड लाइट्स

- अतिक्रमण

स्थायी हो समाधान तो मिले आराम

- पुरानी व जर्जर सीवर व पेयजल पाइपलाइनें होने से प्रॉब्लम दूर नहीं हो पाती है.

- सीवर लाइनों में सॉलिड वेस्ट फेंकने से भी प्रॉब्लम बनी रहती है.

- पेयजल पाइप लाइनों में लीकेज की समस्या दूर नहीं हो रही है.

- आवारा पशुओं को रखने के लिए नगर निगम के कांजी हाउसों में पर्याप्त जगह नहीं है.

- कर्मचारियों की मनमानी से बर्थ व डेथ सर्टिफिकेट व भवनों के नामांतरण से जुड़े मामले महीनों लम्बित रहते हैं.

- आईजीआरएस की अपेक्षा मैनुअल शिकायतों के निस्तारण की गति धीमी है.

एक नजर नगर निगम पर

- 497 शिकायतें हेल्पलाइन पर आई अगस्त में

- 263 का तय समय सीमा में हुआ निस्तारण

- 15 से 20 शिकायतें आती हैं डेली हेल्पलाइन पर

- 30 से 50 फीसदी तक ही हो पाता है निस्तारण

- 712 शिकायतें आई पिछले महीने में आईजीआरएस पर

- 520 शिकायतों का किया गया निस्तारण

- 128 शिकायतें पर आई स्वच्छता एप पर

जलकल में दर्ज शिकायतों का हाल

- 140 से 180 तक शिकायतें डेली आती हैं सीवर व पानी से जुड़ी

- 4100 से ज्यादा शिकायतें आई अगस्त में

- 1950 से ज्यादा मामलों का हुआ निस्तारण

- करीब 50 फीसदी प्रॉब्लम ही दूर हो पाती हैं हर महीने

नगर निगम हेल्पलाइन, एप और आईजीआरएस पर आई शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करने का प्रयास किया जाता है. इसकी डेली समीक्षा होती है. निस्तारण में लापरवाही बरतने पर कर्मचारियों कार्रवाई होगी.

रमेश चन्द्र सिंह, संयुक्त नगर आयुक्त

सीवर व वाटर से जुड़ी प्रॉब्लम को दूर करने के लिए जूनियर इंजीनियर्स की वार्डवाइज जिम्मेदारी तय की गई है. कई जगहों पर शिकायत दूर करने के बाद भी कुछ कारणों से री-कम्प्लेंट आती है. उसे भी दूर करवाया जाता है.

रघुवेन्द्र कुमार, सचिव जलकल