-16.5 करोड़ रुपए की लागत से बनना है नाला, 14 करोड़ रुपए हो गए खर्च फिर भी अधूरा है काम

-वन विभाग से नहीं मिल रही एनओसी, खुले नाले से कभी भी हो सकती है दुर्घटना

GORAKHPUR: सिंघडि़या से तुर्रा नाले तक 16.5 करोड़ की लागत से तैयार हो रहे नाले के निर्माण में रुकावटें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। दिसंबर 2013 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट 6 वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका है। जबकि, इसमें 14 करोड़ रुपए खर्च हो चुका है। शुरुआती दिनों में नाले की डिजाइन को लेकर पार्षद व विधायक के बीच रस्साकशी चलती रही। तकनीकी समस्याएं दूर होने के बाद भी निर्माण कार्य कई बार रुका और फिर शुरू हुआ। अब एक बार फिर नाला निर्माण रूक गया है, इस बार कारण वन विभाग की ओर से एनओसी नहीं मिलना है। दो महीने से काम रूका हुआ है, जिम्मेदारों का कहना है कि जल्द तकनीकी समस्याओं को दूर कर लिया जाएगा। लेकिन चुनाव पूरा होने तक इसकी संभावना बेहद कम है।

तीन साल में होना था पूरा

नाले की लंबाई कुल छह किमी है, जिसमें से अभी तक करीब चार किमी ही नाला बन सका है। इसके निर्माण को दिसंबर 2013 में स्वीकृति मिली थी और मार्च 2016 में निर्माण को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2014 में पहली किस्त के तौर पर 6.42 करोड़ रुपए भी जारी हो गए और मार्च 2014 में स्थानीय पार्षद ने शिलान्यास भी कर दिया। लेकिन नाला निर्माण की डिजाइन पर नगर विधायक राधा मोहन दास ने दो बार आपत्ति कर निर्माण रोक दिया था। टेक्निकल एक्सपर्ट के सुझाव के बाद किसी तरह निर्माण शुरू भी हुआ लेकिन अभी भी अंजाम तक नहीं पहुंच सका है।

महत्वपूर्ण तथ्य

-दिसम्बर 2013 में 16.05 करोड़ का टेंडर पास

-जनवरी 2014 में 6.42 करोड़ की पहली किस्त जारी

-मार्च 2014 में शिलान्यास

-मार्च 2014 में नगर विधायक ने जताई आपत्ति

-अक्टूबर 2016 में जांच हुई पूरी

-नवम्बर 2016 में 3.42 करोड़ जारी

-दिसम्बर 2016 में 3.42 करोड़ जारी

-मार्च 2016 तक काम होना था पूरा

काम की लागत हो गई दोगुना

नाले का टेंडर 2013 में पास हो गया था। तब इसका कुल बजट 16.05 करोड़ रुपए था। तब से अब तक महंगाई काफी बढ़ गई है। बालू, मोरंग, गिट्टी, सरिया के दाम काफी बढ़ गए हैं। इसके अलावा कई जगहों पर नाले की गहराई बढ़ गई है और कई जगहों पर मानक को भी पहले से बेहतर कर दिया गया है। अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए 30 करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर जांच-पड़ताल चल रही है। जांच की इस लम्बी प्रक्रिया में सरकारी पैसों का नुकसान और पब्लिक को परेशानी ही हासिल हुई है।

वन विभाग से नहीं ली एनओसी

नाला निर्माण के लिए रास्ते में आ रहे कई पेड़ों को काटना जरूरी हो गया है। लेकिन कार्यदायी संस्था ने इस संबंध में वन विभाग से एनओसी नहीं ली है। जिसके कारण पेड़ों के काटने पर विभाग को आपत्ति है। साथ ही नाले के रास्ते में मोबाइल टावर व कई घर आ रहे हैं। इन अतिक्रमण को हटाने के लिए चुनाव के दौरान पुलिस फोर्स की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। यानि नाले के निर्माण की कार्रवाई अब चुनाव के बाद ही आगे बढ़ेगी।