-सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए निगम खरीदेगा 25 एकड़ जमीन

-अभी तक निगम नहीं कर पाया था व्यवस्था, लगातार विवाद के बाद निगम ने लिया फैसला

GORAKHPUR: शहर में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए नगर निगम के जमीन की तलाश लगभग पूरी हो गई है। प्लांट लगाने के लिए नगर निगम बालापार में 25 एकड़ जमीन की खरीदारी करने जा रहा है। निगम वर्षो से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए जगह की तलाश कर रहा था। निगम एरिया के 70 वार्डो से रोजाना 351 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इसके निस्तारण के लिए निगम के पास अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं है।

वार्डो से कूड़े को उठाकर एकला बंधा सहित कई जगहों पर गिराया जा रहा था। लेकिन कूड़े से फैलने वाली गंदगी और बीमारी के कारण स्थानीय नागरिक कई बार विरोध कर चुके थे। इतना ही महेसरा, बिछिया व एकला बंधे पर सैकड़ों लोग प्रदर्शन कर चुके हैं। ऐसे में निस्तारण केन्द्र को स्थापित करना निगम के लिए बड़ी चुनौती थी। यदि सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट तैयार कर लिया जाता है तो शहर से निकलने वाले 351 मीट्रिक टन कूड़े को निस्तारित करने के साथ निगम की आय भी बढ़ाई जा सकती है।

12 साल में अब मिली जमीन

स्वच्छता सर्वेक्षण की शुरुआत के बाद शहर की रैंकिंग सुधारने के लिए निगम पर दबाव बढ़ता जा रहा था। पहले महेसरा में प्लांट लगाने की योजना थी। प्लांट लगाने के लिए दीवार भी तैयार कर दी गई थी। लेकिन विरोध के बाद वहां काम बंद हो गया। 2006 से जारी कवायद के तहत 30 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस योजना को 2012 में पूरा हो जाना था। लेकिन नगर निगम के अधिकारियों को इस प्रोजेक्ट की स्थापना के लिए जमीन तलाशने में चार साल लग गए। 2010 में जंगल बहादुर अली में 11.567 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत कर निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था जल निगम को सौंप दिया गया, लेकिन दो साल में ही काम बंद हो गया।

ठप पड़ा है निर्माण कार्य

जल निगम ने महेसरा में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने के लिए दिसंबर 2010 से काम शुरू किया था। इसके तहत बाउंड्री वाल, वर्कर रेस्ट रूम, इलेक्ट्रिकल पैनल और प्रशासनिक भवन से जुड़े निर्माण कार्य कराए गए थे। लेकिन बरसात के मौसम में अधिक बारिश के बाद काम रोक दिया गया था। निचली जमीन होने के कारण इसके किनारे पांच फीट ऊंचा बांध बनाने और डिजाइन बदलने आदि को लेकर कार्यदायी संस्था ने जून 2012 से निर्माण कार्य पूरी तरह ठप कर दिया। शासन स्तर से कोई निर्णय न होने के कारण दोबारा काम शुरू नहीं हो सका।

निगम कहीं भी गिरा रहा कूड़ा

कूड़ा निस्तारण केन्द्र नहीं होने की वजह से निगम को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अभी तक निगम महेसरा, बिछिया, एकला बंधा आदि जगहों पर कूड़ा गिरा रहा है। आए दिन हो रहे विवाद में कूड़ा गाडि़यों के ड्राइवरों की पिटाई हो जा रही थी। शहर में रोजाना निकलने वाले 351 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण लो लैंड, खाली प्लाटों, गढ्डों, बंधों से लेकर राष्ट्रीय तक के किनारे गिराया जा रहा है। कूड़ा निस्तारण को लेकर सफाई कर्मियों को ग्रामीणों के संघर्ष का भी सामना करना पड़ रहा है।

क्या है सालिड वेस्ट मैनेजमेंट

कचरे का निस्तारण या रिसाइक्लिंग इस तरीके से करना कि किसी तरह का हानिकारक तत्व ना बचा रहे, सालिड वेस्ट मैनेजमेंट कहलाता है। इसके तहत कचरे का किसी और प्रोडक्शन में यूज किया जाता है। जैसे कागज, आयरन, एल्युमिनियम, तांबा, स्टील, कांच को रिसाइकिल कर इसको फिर से दूसरे प्रोडक्ट तैयार करने में उपयोग कर लिया जाता है। कागज को रिसाइकल कर पेड़ों को कटने से रोका जा सकता है। जबकि, कचरा निस्तारण में घरों से निकलने वाले आर्गेनिक कचरे को बायो कंपोस्ट और मिथेन गैस में बदल कर उसका उपयोग किया जा सकता है।

वर्जन

सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए 25 एकड़ जमीन की जरूरत है। कई जगहों पर जमीन देखने के बाद बालापार में 25 एकड़ जमीन को चिह्नित कर लिया गया है। जमीन निगम के जरूरत के मुताबिक है जल्द प्लांट स्थापित करने की दिशा में काम आगे बढ़ाएगा।

डीके सिन्हा, अपर नगर आयुक्त, गोरखपुर