- राज्य संपत्ति विभाग में जॉब के नाम पर ठगी, एफआईआर दर्ज

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राज्य संपत्ति विभाग में जॉब दिलाने के नाम पर जालसाज ने नौ बेरोजगारों से 32.25 लाख रुपये ऐंठे और फरार हो गया. भुक्तभोगियों ने सीओ गाजीपुर से शिकायत की तो उनके दखल के बाद एफआईआर दर्ज की गई.

बड़े अधिकारियों से पहचान का दिया हवाला

आजमगढ़ कप्तानगंज निवासी सुरेंद्र प्रताप शर्मा के मुताबिक, वे विभागीय काम से अक्सर राजधानी के कैसरबाग में आते थे. इसी दौरान उनकी मुलाकात सीमांत नगर निवासी राजपूजन शर्मा से हुई. उसने सचिवालय के बड़े अधिकारियों से जान-पहचान का हवाला दिया और उनके दोनों बेटों को वहां चपरासी के पद पर रखवाने की बात कही.

दस्तावेज लेकर दफ्तर बुलाया

सुरेंद्र ने बताया कि उनके राजी होने पर रामपूजन ने दोनों बेटों की मार्कशीट व अन्य दस्तावेज लेकर उन्हें मुंशी पुलिया स्थित दफ्तर बुलाया. कुछ दिनों बाद वे दोनों बेटों के साथ रामपूजन के दफ्तर पहुंचे. वहां रामपूजन ने दोनों बेटों के दस्तावेज और पुलिस सत्यापन सर्टिफिकेट मांगा. जो उसे दे दिए गए. कुछ समय बाद रामपूजन ने उन्हें फिर बुलाया और 10 लाख रुपये की मांग की.

चार किश्तों में दिये नौ लाख

सुरेंद्र ने उन्हें चार किश्तों में नौ लाख रुपये दिए. रुपये मिलने के बाद रामपूजन ने एक सप्ताह में सुरेंद्र प्रताप के दोनों बेटों को ज्वाइनिंग लेटर दिलाने का आश्वासन दिया. लेकिन, लंबा वक्त बीतने के बाद भी जब नौकरी नहीं लगी, तो सुरेंद्र ने रकम वापस मांगी. इस पर रामपूजन टालमटोल करने लगा. दबाव बनाने पर रामपूजन ने सुरेंद्र से कहा कि अगर वह कुछ और रकम दें तो नौकरी लग सकती है.

खुली रह गई आंखें

शक होने पर सुरेंद्र ने पड़ताल की तो पता चला रामपूजन ने कई लोगों से नौकरी के नाम पर रुपये लिए हैं और कई लोगों को रकम वापसी के लिये चेक भी दिया है. जानकारी मिलने पर सुरेंद्र रामपूजन के घर पहुंचे, लेकिन वह तब तक ताला बंद कर फरार हो चुका था. आखिरकार, सुरेंद्र ने सीओ गाजीपुर से इसकी शिकायत की. उनके आदेश पर गाजीपुर पुलिस ने रामपूजन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली.

इन लोगों से ठगी

पुलिस के मुताबिक, रामपूजन ने सुरेंद्र के अलावा बगेदू शर्मा से चार लाख, अजय शर्मा से 50 हजार, वशिष्ठ नारायण से 45 हजार, संतोष से 3.80 लाख, रीता कपूर से 2.50 लाख, सुदामा चौहान से 10 लाख और प्रमोद पांडेय से दो लाख रुपये ऐंठे हैं. उसकी तलाश की जा रही है.