JAMSHEDPUR: बरही से हजारीबाग, रांची व जमशेदपुर होते हुए बहरागोड़ा के पास बंगाल सीमा तक जाने वाले नेशनल हाइवे (एनएच)-33 के चौड़ीकरण का काम हैदराबाद की मधुकॉन कंपनी से छिन सकता है. हाईकोर्ट रांची की फटकार के बाद एनएचआई के अधिकारियों ने मधुकॉन से काम छीनकर दूसरी कंपनी को देने की तैयारी कर ली है. इससे अब एनएच-33 की तस्वीर नया टेंडर खुलने के बाद ही बदलने की उम्मीद है.

रांची से दिल्ली तक फजीहत

बता दे कि नेशनल हाइवे के निर्माण में हुए घोटाले का मामला हाईकोर्ट में चले जाने के बाद एनएचएआइ के अधिकारियों की रांची से दिल्ली तक फजीहत हुई है. सूत्रों की मानें तो केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव ने एनएचएआइ के अधिकारियों को इस मुद्दे पर दो टूक फैसला लेने को कहा है. वहीं दूसरी तरफ, सीबीआइ जांच का दबाव भी है. सूत्रों के अनुसार एनएचएआइ ने मधुकॉन को एनएच 33 के चौड़ीकरण के काम से अलग करने की फाइल तैयार कर ली है. जिसे जल्द ही केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजा जाएगा. जिसके बाद ही कुछ स्पष्ट हो सकेगा अगर मधुकॉन कंपनी से काम ले लिया जाता है तो इसके बाद नए सिरे से टेंडर होगा.

चल रही सीबीआई जांच

रांची से महुलिया तक 163.700 किलोमीटर लंबे एनएच 33 के चौड़ीकरण का काम 2010 में मधुकॉन को मिला था. उसी साल दिसंबर में शुरू हुए एनएच 33 के निर्माण का काम जून 2015 में पूरा होना था. लेकिन, मधुकॉन की लापरवाही के चलते एनएच 33 की दुर्दशा होती चली गई. मधुकॉन ने केनरा बैंक की हैदराबाद शाखा से 845 करोड़ रुपये का लोन लिया था. लेकिन, इनमें से एक बड़ी रकम कहीं और खर्च कर दी है. मधुकॉन पर 264 करोड़ रुपये कहीं और खर्च करने का आरोप है. मामले की सीबीआइ जांच चल रही है.

ट्रेलर पटलने से लगा जाम

एनएच 33 मौत की सड़क बन गई है. इस पर रोज हादसे हो रहे हैं. कोलकाता की तरफ से रांची की ओर जा रहा एक ट्रेलर शुक्रवार की रात एनएच 33 पर स्वर्णरेखा कॉलोनी के करीब एक गड्ढे में फंस कर पलट गया. ट्रेलर पलटने से इसके ड्राइवर और खलासी को चोट आई है. शनिवार को जब ट्रेलर को क्रेन से उठाया जा रहा था तो एनएच पर लंबा जाम लग गया. लोग परेशान हो गए. जाम कई घंटे लगा रहा. एनएच 33 पर एलीट अस्पताल के पास चाय की गुमटी रखने वाले राकेश कुमार ने बताया कि शुक्रवार की रात को कोलकाता से रांची जा रहे एक डाक्टर की कार सनशाइन कांप्लेक्स के सामने गड्ढे में फंस गई थी. इस पर सवार लोग कई घंटे परेशान रहे तब जाकर कार निकल सकी.

..लेकिन नहीं बदली तस्वीर

एनएच-33 पर तीन मुख्यमंत्रियों ने अपने कार्यकाल में पूरा जोर लगाने का दावा किया था. लेकिन, फिर भी एनएच 33 की तकदीर संवर नहीं पाई. पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा, हेमंत सोरेन और वर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दास इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री से मिले थे लेकिन, नतीजा सिफर रहा. सांसद विद्युत वरण महतो भी कई बार केंद्रीय मंत्री से मिले. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री ने खुद रांची में आठ जून को मोदी फेस्ट में एनएच 33 का चौड़ीकरण हर हाल में दिसंबर तक पूरा करने को कहा लेकिन, ऐसा नहीं हो सका.