कई योगदानों के चलते मिला सम्मान
कानपुर
। आज नेल्सन मंडेला भले ही हमारे बीच नहीं है लेकिन दुनिया में अगर शांति की बात हो तो हम सभी उन्हें जरूर याद करते हैं। आज यानी कि 18 जुलाई को नेल्सन मंडेला का 100वां जन्मदिन है। संयुक्त राष्ट्र उनके हर जन्मदिन को नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाता है। बता दें कि नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस संयुक्त राष्ट्र महासभा मंडेला के शांति स्थापना, रंग-भेद समाधान, मानवाधिकारों की रक्षा और लैंगिक समानता की स्थापना के लिए किए गए उनके सतत प्रयासों के लिए मनाता है।
नेल्सन मंडेला दिवस : अफ्रीका के गांधी,जिन्होंने खाली हाथ ढहा दिया था नस्लभेद का किला
1994 में बने राष्ट्रपति
संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस दिन को विश्वभर में मानाने का निर्णय नवंबर, 2009 में लिया गया था और पहला नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस मंडेला के 92वें जन्मदिन के मौके पर यानी कि 18 जुलाई, 2010 को मनाया गया था। महासभा के अध्यक्ष अली ट्रेकी ने पहली बार इस दिन की घोषणा करते हुए कहा था कि यह कदम उस महान व्यिक्त को सम्मानित करने के लिए लिया उठाया गया है, जिसने हमेशा लोगों की भलाई के लिए काम किया और जेल में संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि मंडेला ने लोगों के लिए अपने जीवन के 27 वर्ष जेल में काटे, जो बेहद सम्मान की बात है। बता दें कि 1990 में जेल से रिहाई के बाद मंडेला दिक्षण अफ्रीका के राष्ट्रपति बने और वर्ष 1994 से 1999 तक उन्होंने सत्ता संभाली।

इसलिए कहे गए गांधी
नेल्सन मंडेला का जन्म दक्षिण अफ्रीका में बासा नदी के किनारे ट्रांसकी के मर्वेजो गाँव में 18 जुलाई, 1918 को हुआ था। उन्हें लोग प्यार से मदीबा बुलाते थे। उन्हें लोग अफ्रीका का गांधी भी कहते हैं। बता दें कि उन्हें ये नाम यूं ही नहीं दिया गया था। दरअसल, मंडेला गांधी जी के विचारों से काफी प्रभावित भी थे। उनके ही विचारों से ही प्रभावित होकर मंडेला ने रंगभेद के खिलाफ एक अभियान शुरू की थी। उन्हें अपनी मुहिम में ऐसी सफलता मिली कि उन्हें ही अफ्रीका का गांधी पुकारा जाने लगा। रंगभेद के प्रति उनका संघर्ष कितना महत्वपूर्ण था, यह इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनके जीवित रहते संयुक्त राष्ट्र ने सम्मान में उनके जन्मदिन 18 जुलाई को 'मंडेला दिवस' के रूप में घोषित कर दिया और इसे अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मानाया था।

भारत रत्न पाने वाले पहले विदेशी
नेल्सन मंडेला ने जिस तरह से देश में रंगभेद के खिलाफ अपना अभियान चलाया उसने दुनियाभर को अपनी ओर आकर्षित किया। यही कारण रहा कि भारत सरकार ने 1990 में उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया। मंडेला, भारत रत्न पाने वाले पहले विदेशी हैं। साल 1993 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया। इसके बाद बड़ी बीमारी के चलते 3 दिसंबर, 2013 को 95 वर्ष की उम्र में नेल्सन मंडेला का निधन हो गया।
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