- चार महीने बाद भी सीवर लाइन बदलने का काम नहीं हुआ शुरू, फिलहाल पुरानी काशी को सीवर प्रॉब्लम से नहीं मिल सकेगी निजात

- जलनिगम की गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की कार्ययोजना को नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्रालय ने नहीं दी मंजूरी

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पुरानी काशी (सिस वरुणा) की सीवर लाइन बदलने के प्लान पर 'ग्रहण' लग गया है. यूपी जलनिगम (गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई) के रिवाइज डिमांड को केन्द्रीय नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय ने मंजूरी नहीं दी है. मंत्रालय ने डिमांड पर आपत्ति लगाते हुए कम खर्च वाला प्लान भेजने का निर्देश दिया है. ऐसे में शहर को फिलहाल सीवर प्रॉब्लम से निजात नहीं मिलने वाली है.

बनारस में लटका काम

फुल सीवेज सॉल्यूशन सिस्टम में यूपी के बनारस, इलाहाबाद और कानपुर शहर चयनित किए गए हैं. तीनों शहरों में पुरानी सीवर लाइनों को बदलने का काम होना है. इलाहाबाद और कानपुर में पिछले तीन महीने से काम चल भी रहा है. गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने केन्द्रीय नदी विकास व गंगा मंत्रालय को पहले एक हजार करोड़ रुपये की लागत से शहर में पुरानी सीवर लाइनों को बदलने और मेंटिनेंस करने की डिमांड भेजी थी. मोहल्लों का सर्वे भी कर लिया गया, लेकिन मंत्रालय ने इसमें कुछ और बिन्दुओं को समाहित करने की बात कहकर उसे लौटा दिया. इसके बाद विभाग ने 1403 करोड़ रुपये की रिवाइज डिमांड भेज दी. केन्द्रीय अफसरों को काम के हिसाब से यह धनराशि ज्यादा लगी तो प्लान अटक गया.

मरम्मत के बाद भी बनी समस्या

शहर में बिछी सीवर लाइनें पांच दशक से ज्यादा पुरानी हैं. पक्का महाल और उसके आसपास एरिया में सीवर लाइनें तो सैकड़ों वर्ष पुरानी हैं. इससे आए दिन सीवर लाइनें कहीं न कहीं क्षतिग्रस्त रहती हैं. रही सही कसर विकास कार्यो में लगी निजी कम्पनियों की खोदाई ने पूरी कर दी है. सीवर क्षतिग्रस्त होने से जलनिकासी व्यवस्था ठप हो जाती है और गंदा पानी सड़कों पर बहता है. वहीं तमाम मोहल्लों में सीवर का पानी पेयजल की पाइपलाइनों में चला जाता है. जिससे घरों में गंदा पानी आने लगता है. सीवर लाइनों की मरम्मत करने के बाद भी आए दिन सीवेज व्यवस्था ध्वस्त रहती है.

ट्रांसवरुणा एरिया में काम पूरा नहीं

गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की लापरवाही से अब तक ट्रांसवरुणा एरिया (वरुणा पार) में सीवर लाइन का गैप जोड़ने का काम पूरा नहीं हो सका है. पांडेयपुर समेत कई जगहों पर ब्रांच लाइनों को मेन सीवर लाइनों से जोड़ा भी नहीं गया है. इससे बनकर तैयार गोइठहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट एसटीपी को शुरू करने में दिक्कत आ रही है. यही नहीं, 50260 हाउसहोल्ड सीवर कनेक्शन देने के सापेक्ष अब तक करीब 23 हजार कनेक्शन ही दिए जा सके हैं.

एक नजर

- 600 किमी सिसवरुणा में बिछेगी नई सीवरलाइन

- 3 फेज में सीवर लाइन बिछाने का प्लान

- 1403 करोड़ की भेजी गई मंत्रालय को रिवाइज डिमांड

- 142 किमी सीवरलाइन ट्रांसवरुणा में

नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय ने रिवाइज डिमांड पर आपत्ति लगा दी है. इसके चलते जर्जर सीवर लाइनों को बदलने का काम शुरू नहीं हो सका. अब फिर से नई कार्ययोजना तैयार कराई जा रही है.

एसके राय, जीएम, जलनिगम