क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : सरकारी दावों के बीच हकीकत है कि रांची के लगभग 1600 प्राथमिक व मीडिल स्कूलों में आज भी बिजली कनेक्शन नहीं है. जबकि, पूरे जिले में करीब 2403 स्कूल हैं. इनमें मात्र 761 स्कूलों में ही बिजली की सुविधा है. इतना ही नहीं 1501 से ज्यादा स्कूलों की चहारदीवारी नहीं है. ऐसे में बिना चहारदीवारी वाले स्कूलों में बच्चे अपने को असुरक्षित महसूस करते हैं. ऐसे स्कूलों में असमाजिक तत्व, जुआरी व नशेड़ी अड्डा जमाए रखते हैं.

वायरिंग है, कनेक्शन नहीं

राजधानी के ज्यादातर स्कूलों में वायरिंग का काम कंप्लीट हो चुका है, लेकिन अभी तक बिजली का कनेक्शन नहीं मिला है. इधर, सरकार का दावा है कि राज्य के 80 फीसदी स्कूलों में बिजली की व्यवस्था बहाल कर दी गई है, लेकिन यह हकीकत से परे है. झारखंड शिक्षा परियोजना के अधिकारियों ने सभी स्कूलों में बिजली कनेक्शनके आंकड़े मांगे हैं. उनका कहना है कि राज्य के सभी स्कूलों में दिसंबर तक बिजली कनेक्शन दे दिया जाएगा.

आसान नहीं है टारगेट पूरा करना

राज्य सरकार का दावा है कि वे इस साल दिसंबर तक बचे 22 हजार स्कूलों में बिजली उपलब्ध करा दिया जाएगा. लेकिन, इन स्कूलों में जो इंफ्रास्ट्रक्चर है उसके लिहाज से हर साल करीब 2500 स्कूलों में बिजली की व्यवस्था बहाल की जा सकती है. लेकिन दावा 4 महीने में 22 हजार से ज्यादा स्कूलों में बिजली व्यवस्था बहाल करने के सपने दिखाए जा रहे हैं. गौरतलब है कि बीचे चार सालों में मात्र दस हजार स्कूलों में ही बिजली कनेक्शन दिया जा सका है.