- विभागीय कार्रवाई के बावजूद नहीं सुधर रहे पुलिस कर्मचारी

- लापरवाही, अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता, मनमानी के आरोप

GORAKHPUR: जिले की पुलिस का रवैया बदलने का नाम नहीं ले रहा है. पब्लिक के साथ दु‌र्व्यवहार की बात हो या फिर कामकाज में सुधार की, धीरे-धीरे पुलिस कर्मचारी अपने पुराने ढर्रे पर लौटने लगे हैं. पुलिस कर्मचारियों में अनुशासन बरकरार रखते हुए पब्लिक में भरोसा बढ़ाने की सारी कवायद दम तोड़ दे रही है. एसएसपी की सख्ती के बावजूद पुलिस कर्मचारियों के बर्ताव में बदलाव नहीं आ रहा है. सीनियर अफसरों का कहना है कि शिकायत सामने आने पर सख्त कार्रवाई की जा रही है.

चार माह में 20 से अधिक पर कार्रवाई

प्रदेश में सरकार बदलने के बाद पुलिस कर्मचारियों का व्यवहार बदलने की कवायद जोर-शोर से शुरू हुई थी. तबादलों के चक्कर में धीरे-धीरे व्यवस्था दम तोड़ने लगी. पुलिस कर्मचारियों की मनमानी फिर से शुरू हो गई. मसलन, पासपोर्ट आवेदन पर पुलिस रिपोर्ट लगाने के लिए थानों पर रुपए मांगने, मुकदमा लिखने में हीला-हवाली करने, फर्जी मुकदमों में फंसाकर धन उगाही करने, अपराधियों और माफिया किस्म के लोगों से जुड़कर उनको लाभ पहुंचाने की शिकायत सीनियर अफसरों तक पहुंचने लगीं. मातहतों की शिकायत सामने आने पर पुलिस अधिकारी कार्रवाई से नहीं हिचक रहे. जिले में चार माह के भीतर 20 से अधिक पुलिस कर्मचारियों को सस्पेंड और लाइनहाजिर किया जा चुका है. इनमें इंस्पेक्टर, चौकी प्रभारी, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल शामिल हैं. जबकि पूर्व एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज के कार्यकाल में 60 से अधिक पुलिस कर्मचारियों पर अनुशासन की गाज गिरी थी. पुलिस कर्मचारियों पर कार्रवाई के बावजूद स्थिति नहीं बदल रही.

इन शिकायतों में नपते पुलिस कर्मचारी

- थाने पर पहुंचे फरियादियों से खराब व्यवहार करना

- थानों पर तैनाती के दौरान पब्लिक से धन उगाही करना

- सरकारी काम में लापरवाही, मुकदमों के निस्तारण में मनमानी

- ऑर्डर आफ कमांड को नजरअंदाज करके मनमाने तरीके से काम करना

- पासपोर्ट के लिए रिपोर्ट लगाने, एफआईआर के लिए रुपए मांगने की शिकायत

- ड्यूटी में लापरवाही, अनुशासनहीनता, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता के आरोप

हाल में हुई कार्रवाई भी रही बेअसर

8 सितंबर 2018: कैंपियरगंज में तैनात रहे एसएचओ सुनील राय को एसएसपी ने लाइनहाजिर किया. एक दिन पूर्व उनको एक फाइल संग तलब किया गया था.

2 सितंबर 2018: अभियुक्तों में पकड़ने में लापरवाही इंस्पेक्टर सहजनवा अजय कुमार सिंह और तिवारीपुर के प्रभारी प्रमोद तिवारी को एसएसपी ने सस्पेंड किया.

26 अगस्त 2018: गुलरिहा थाना में पकड़े गए रेप और पॉक्सो एक्ट के अभियुक्त को पूर्व एसएचओ गोपाल त्रिपाठी ने मुचलके पर छोड़ दिया. इसकी जांच में वह दोषी पाए गए. एसएसपी ने उनको स्वेच्छाचारिता, अनुशासनहीनता, उदासीनता और लापरवाही में सस्पेंड कर दिया.

13 जून 2018: सहजनवा थाना में तैनात कांस्टेबल राजकुमार पर पासपोर्ट पर रिपोर्ट लगाने के रुपए मांगने का आरोप, एसएसपी ने लाइन हाजिर किया. वह बार-बार आवेदक से रुपए मांग रहा था.

12 जून 2018: लूट की सूचना पर लापरवाही दिखाने पर जटेपुर चौकी प्रभारी गौरव राय कन्नौजिया और बेनीगंज चौकी प्रभारी ओंकारनाथ श्रीवास्तव को लाइन हाजिर किया गया. दोनों दरोगाओं ने वायरलेस की सूचना को नजरअंदाज किया था.

11 जून 2018: बरगदवा के चौकी प्रभारी विनय कुमार को लाइन हाजिर किया गया. घायल कांस्टेबल के प्रति असंवेदनशील व्यवहार और लापरवाही में कार्रवाई हुई.

वर्जन

ऐसी स्थिति में व्यवहार और स्वभाव में गहरी जड़ें जमा चुकी होती हैं. दंड देकर हम उस व्यवहार को रोकना चाहते हैं. लेकिन अगले व्यक्ति को अपनी गलती से मोटिवेशन मिल रहा है तो ऐसे में उसे दंड देकर नहीं सुधार पाएंगे. पुलिस कर्मचारियों को सस्पेंशन का दंड काफी छोटा लगता होगा. इसलिए वह इसको लेकर गंभीर नहीं होते. दूसरा यह भी है कि एक तरह के स्वभाव में बदल जाता है. तीसरी बात होती है कि अगला व्यक्ति जिस कार्य में अक्षम है. फिर भी उसे जिम्मेदारी दे दी गई है. ऐसे में दंड नहीं बल्कि ट्रेनिंग के जरिए कार्य-व्यवहार में सुधार लाया जा सकता है.

- डॉ. अमित शाही, मनोचिकित्सक

पुलिस विभाग में अनुशासन बहुत जरूरी होता है. लेकिन कभी-कभी इसका काफी दुरुपयोग होता है. यह किसी भी लेवल पर हो सकता है. दंड देना पर्याप्त नहीं होता है बल्कि यह समीक्षा होनी चाहिए कि इसका कितना असर पड़ा है. इस तरह की कार्रवाई से कुछ लोग संतुष्ट हो सकते हैं लेकिन अगले के कार्यव्यवहार में बदलाव नहीं आता. ऐसे में कार्रवाई निष्प्रभावी नजर आती है.

- डीएन शुक्ला, डिप्टी सीओ रिटायर