- यूपी रोडवेज गोरखपुर रीजनल ऑफिस में टेंडर कमेटी सदस्यों के बीच चल रहा कमीशन की गणित

- टेंडर खुलने के बाद भी डेढ़ महीने से रेलवे बस स्टेशन पर नहीं हो रही सफाई

GORAKHPUR: सिटी का रेलवे बस स्टेशन कहने को तो ए ग्रेड बस स्टेशन है लेकिन पैसेंजर्स फैसिलिटी की बात करें तो वो कमीशन के खेल में कोरा दावा बनकर रह गई हैं. अन्य सुविधाओं की तो बात ही छोडि़ए, कमीशन के चक्कर में डेढ़ माह से सफाई के ठेके के लिए पड़े टेंडर खुलने के बाद भी अभी तक सफाई ठेकेदार फाइनल नहीं किया जा सका है. नतीजा ये कि सफाई ना हो पाने के चलते पूरे परिसर में जिधर देखो बस गंदगी ही नजर आती है. नाम न छापने की शर्त पर ठेकेदारों ने बताया कि कमीशन की डिमांड और अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल न होने से अब तक ठेका फाइनल नहीं किया जा सका है. जिससे आलम यह है कि बस स्टेशन की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है.

मुख्यालय का निर्देश हो गया हवा-हवाई

बता दें, गोरखपुर का रेलवे बस स्टेशन ए ग्रेड बस स्टेशन है. करीब 1100 से ज्यादा बसें प्रतिदिन यहां आती हैं. 50 हजार से ज्यादा यात्रियों का बस स्टेशन पर आना जाना लगा रहता है. भारी मात्रा में बस यात्रियों के आने जाने पर गंदगी होना भी स्वाभाविक है. स्वच्छ भारत मिशन के तहत यूपी रोडवेज मुख्यालय की तरफ से बेहतर साफ-सफाई की व्यवस्था करने वाली फर्म या ठेकेदार को चिन्हित कर यहां भी सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने का निर्देश था. लेकिन इसके लिए अभी तक गोरखपुर रीजन के अधिकारियों की टीम न तो ठेकेदार ही तय कर पाई है और न ही फर्म डिसाइड कर पा रही है. जबकि जुलाई में ही सफाई के लिए चार ठेकेदारों ने टेंडर डाला था और टेंडर निकल भी गया है, लेकिन किस ठेकेदार को सफाई व्यवस्था के लिए फाइनल किया गया है. इस बात को अभी तक न तो आरएम की अध्यक्षता वाली टीम ने डिसाइड किया है और न ही ठेकेदारों के बीच ही सफाई व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार का कोई गाइडलाइन जारी की गई है. जबकि आरएम की अध्यक्षता वाली कमेटी में एआरएम फाइनेंस, संबंधित डिपो के एआरएम व एसएम सदस्य होते हैं, लेकिन ये सभी अभी तक तय नहीं कर पाए हैं कि किस फर्म या ठेकेदार को बस स्टेशन की सफाई करनी है.

फैक्ट फाइल

बस स्टेशन पर आने वाली बसों की संख्या - 1100

गोरखपुर डिपो पर आने जाने वाले यात्रियों की संख्या - 50 हजार से ऊपर

गोरखपुर डिपो में बसों की संख्या - 200 से ऊपर