क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ :सिटी के स्कूल कॉलेजों में इस बार एक दिन भी फागिंग नहीं करायी गयी है. नतीजा यह है कि बच्चों को मच्छरों का प्रकोप झेलना पड़ रहा है और उन्हें घर से ही एंटी मच्छर लिक्विड का लेप लगाकर भेजा जा रहा है. परिजनों का कहना है कि बच्चों के शरीर पर मच्छरों के काटने के साफ निशान देखे जा सकते हैं. विदित हो कि राजधानी में चिकनगुनिया और डेंगु के प्रकोप को देखते हुए हर मोहल्ले में फागिंग के लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं, उसके बावजूद भी शिक्षण संस्थानों में फांगिंग के नहीं कराए जाने से बच्चों की तबीयत बिगड़ रही है.

प्राइम टारगेट होते हैं बच्चे

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को मच्छरों का प्राइम टारगेट माना जाता है. इसलिए यह जरुरी है कि जिन स्थानों पर बच्चे खेलते हों, पढाई करते हों या अन्य एक्टिविटी करते हो वहां पर फागिंग नियम से प्रतिदिन कराया जाना चाहिए. लेकिन, नगर निगम की ओर से इस दिशा में लगातार लापरवाही बरती जा रही है. हालांकि, निगम का दावा है कि सिटी में रेगुलर फॉगिंग की जा रही है.

हर इलाके में डेंगू-चिकनगुनिया का कहर

हिंदपीढ़ी से शुरु होने वाला चिगनगुनिया बुखार ने राजधानी के कमोबेश सारे इलाकों को अपने प्रभाव में ले लिया है. थड़पखना, चुटिया, बरियातू और कोकर समेत कई मुहल्लों में इन दोनों बीमारियों के संदिग्ध मरीज मिले हैं. लेकिन, जिला प्रशासन इस दिशा में अभी तक हेल्थ कैंप लगाने के अलावा अन्य कोई भी व्यवस्था दे पाने में असमर्थ है.

शिक्षा विभाग के दफ्तर में भी मच्छरों का आतंक

शिक्षा विभाग का कार्यालय कचहरी चौक के समीर जिस भवन में चलता है उसकी हालत भी खस्ता हो चली है. विभाग के अधिकारी खुद मच्छरों से परेशान हैं. परिसर के भीतर भी बड़े बड़े पेड़ पौधे और गंदगी है जिसके कारण मच्छरों का प्रकोप हावी है. ऐसे में अगर यहां भी डेंगू-चिकनगुनिया अपना पैर पसार ले, इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है.