क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : रांची में उद्योगों को जमीन उपलब्ध कराने का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है. मोमेंटम झारखंड के दौरान निवेश के लिए करार करने वाले उद्योगों को अबतक जमीन नहीं मिल पाई है. ऐसा नहीं है कि उद्योगों के लिए जमीन खोजने का काम नहीं शुरू किया गया. रांची जिले के नामकुम, चान्हो, ओरमांझी और नगड़ी समेत कई इलाकों में जमीन तो देखी गई, लेकिन उसके अधिग्रहण की प्रक्रिया नहीं शुरु हो पाई. अब तो जिन उद्योगपतियों ने यहां निवेश की इच्छा जताई थी, वे जमीन नहीं मिलने से निराश हो चले हैं. ऐसे में वे अपने प्रोजेक्ट से हाथ भी खींच सकते हैं, जिसका खामियाजा यहां के लोगों को भुगतना होगा.

मिलता हजारों युवाओं को जॉब

रांची के युवाओं को आस जगी थी कि मोमेंटम झारखंड के तहत रांची में उद्योग लगाने के लिए जिन कंपनियों ने एमओयू किया है, अगर वह स्थापित हो जाए तो उन्हें जॉब के लिए बाहर का रुख नहीं करना होगा. लेकिन, उनकी भी उम्मीदें अब धूमिल हो चली हैं. न तो उद्योगों को जमीन मिल रहा और न ही हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार. अब यहां के युवाओं की निगाह सरकार पर टिकी है कि वह उद्योगों को खोलने के लिए कब तक जमीन उपलब्ध कराती है.

चान्हो में इंडस्ट्रीज के लिए 50 एकड़ जमीन

चान्हो के बरहे गाव में स्थित सरकारी 50 एकड़ जमीन उद्योगों के लिए देखा गया था. तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने इस जमीन का जायजा भी लिया था. इस बाबत उन्होंने पंचायत के प्रतिनिधियों से वार्ता भी की थी, जिसमें फूड प्रोसेसिंग प्लांट व मेडिकल कॉलेज खोलने को प्राथमिकता दी गई थी, लेकिन इसके बाद जमीन अधिग्रहण की कोई पहल नहीं हो रही है.

नामकुम-पतरातू की जमीन पर नहीं बनी बात

अगर जमीन मिल जाए तो नामकुम-पतरातू में उद्योगों का जाल बिछ जाता, लेकिन इसपर भी ब्रेक लगा हुआ है. नामकुम के बालसिरिंग मौजा में 40 एकड़ के साथ दूसरी जगह भी 30 एकड़ जमीन उद्योगों को देने की बात थी. इन दोनों जमीन का मुआयना भी तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने किया था. इसके अलावा पतरातू में भी उद्योगों के लिए 1000 एकड़ जमीन का मामला अधर में लटका है.

ओरमांझी-नगड़ी में भी जमीन का मामला अधर में

पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा की टीम ने ओरमांझी और नगड़ी में भी जमीन देखी थी. इसमें नामकुम के सोढा मौजा स्थित 210 एकड़ सरकारी भूमि के अलावा साहेर मौजा में फूड पार्क के लिए जमीन अधिग्रहण होना था. इसके अलावा ओरमांझी प्रखंड में दो अलग-अलग जगह 25 व 100 एकड़ भूमि उद्योगों को उपलब्ध कराना था, पर यह भी अधर में अटका है.