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छ्वन्रूस्श्वष्ठक्कक्त्र: टाटानगर रेलवे स्टेशन मैनेजमेंट पैसेंजर्स के नन्हे-मुन्नों के प्रति गंभीर नहीं है. पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु द्वारा ट्रेन में यात्रा के दौरान स्टेशन पर ही दूध उपलब्ध कराने का वादा किया था. टाटानगर रेलवे स्टेशन के स्टॉलों में दूध की व्यवस्था नहीं है. इससे लोगों को दिक्कत हो रही है.

खराब हो जाता है दूध

ट्रेन में दो से तीन दिन की यात्रा के दौरान लोगों को बच्चों के लिए दूध आदि ले जाने में दिक्कत होती है. यात्रा के दौरान घर से लिया हुआ दूध रास्ते में ही खराब हो जाता है. इससे यात्रा के दौरान बच्चों को बिना दूध के ही रहना पड़ता है.

स्टॉल, कैंटीन में नहीं मिला दूध

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट टीम ने कैंटीन में जाकर गर्म दूध मांगा तो दूध नहीं मिला. इस बारे में जब कैंटीन संचालक ने बताया कि अगर कंट्रोलरूम से फोन आता है. स्टेशन मास्टर के आदेश पर संबंधित यात्री का दूध उपलब्ध कराया जाता है.

महिलाओं को होती है परेशानी

टाटा नगर रेलवे स्टेशन से रोज करीब सौ ट्रेनों का आवागमन होता है. इनमें मुंबई से कोलकता जाने वाले लोगों की अच्छी खासी संख्या रहती है. दो से तीन दिन के सफर में दूध को तीन दिन तक चला पाना मुश्किल होता है. ठंड के दिनों में कुहासा के चलते भी ट्रेने 15 से 20 घंटे तक लेट हो जाती है. जिससे यात्रियों का दूध को सुरक्षित रख पाना असंभव हो जाता है. एसे में बच्चों के साथ-साथ महिलाओं को सबसे अधिक समस्या होती है.

कैंटीन संचालकों ने खड़े किए हाथ

टाटा नगर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर संचालित टी शॉप के मालिक राहुल मोदी ने बताया कि स्टेशन पर दूध की मांग कम होने से दूध नहीं रखते हैं, लेकिन कोई भी यात्री अगर दूध की मांग करता है, तो उसे तुरंत गर्म करके दिया जाता है.

रेल मंत्रालय से प्लेटफार्म पर चाय की दुकानों में दूध दिए जाने का आदेश है. यात्रा के दौरान अगर कोई यात्री दूध की मांग करता है, तो दुकानदार उसे गर्म करके दूध देते हैं. रेट चार्ट पर बाकायदा 200 एमएल गर्म दूध के रेट भी अंकित हैं. दुकानदारों को आदेश दिया जाएगा कि वे यात्रियों को दूध उपलब्ध कराएं.

-एचके बलमूचु, स्टेशन मास्टर, टाटानगर रेलवे स्टेशन