क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: मुख्यमंत्री ने सीधी बात साप्ताहिक समीक्षा में कार्रवाई करने का आदेश अधिकारियों को दिया था, लेकिन शिक्षा विभाग के सचिव ने दोषी डीएसई पर कार्रवाई करने के बजाय प्रोमोशन देकर उसका तबादला करवा दिया. मामले में शिकायतकर्ता दर्श चौधरी का कहना है कि धनबाद के पूर्व डीएसई बांके बिहारी सिंह की पहुंच ऊपर तक है. उन्हें कई लोगों का संरक्षण है. शिकायतकर्ता ने विभागीय अधिकारियों द्वारा मोटी रकम लेकर डीएसई बांके बिहारी सिंह के तबादले की बात कही है.

क्या है मामला

धनबाद के पूर्व जिला शिक्षा अधीक्षक बांके बिहारी सिंह के खिलाफ नियुक्ति घोटाला को लेकर मुख्यमंत्री जन संवाद केंद्र में शिकायतवाद संख्या: 2018-34820 (दिनांक: 18/04/2018) दर्ज कराया गया है. इस संबंध में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के संयुक्त सचिव देवेन्द्र भूषण सिंह ने 13 जून को मुख्यमंत्री से कहा था कि डीएसई बांके बिहारी सिंह पर कार्रवाई करने का विचार किया जा रहा है. जल्द ही कार्रवाई करके आपको अवगत करा दिया जाएगा.

15 अगस्त तक होनी थी कार्रवाई

मुख्यमंत्री द्वारा 07 अगस्त को सीधी बात की साप्ताहिक समीक्षा के दौरान विभाग के नोडल अधिकारी को डीएसई बांके बिहारी सिंह के खिलाफ 15 अगस्त तक नियमानुसार कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था फिर भी विभागीय अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई. इसके बाद मुख्यमंत्री के आदेश की अवहेलना करते हुए 04 सितंबर, 2018 को विभाग द्वारा योजनाबद्ध तरीके से डीएसई बांके बिहारी सिंह को प्रोमोशन देते हुए ट्रांसफर कर दिया गया. ऐसे में सवाल उठता है कि मुख्यमंत्री का आदेश नहीं मानने की क्या वजह हो सकती है.

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जनसंवाद केंद्र में ये मामले भी

मैंने झारखंड पुलिस बहाली में आवेदन दिया था. इसमें राज्यभर के आवेदकों ने फार्म भरा था. पुलिस की गलत नीति के खिलाफ युवकों ने हाईकोर्ट में केस जीत लिया. फिर, भी उनलोगों की आजतक बहाली नहीं हुई है.

बबलू राय, जामताड़ा

मैंने बिग बाजार में 10 महीने तक काम किया. इसके बादं काम से हटा दिया गया. जब मैंने ग्रेच्युटी की मांग की तो उनलोगों ने देने से इनकार कर दिया. इस संबंध में मैं जनसंवाद में मामला ले गया तो उनलोगों ने कहा कि यह मामला यहां नहीं चलता है.

देवाशीष कुमार, जमशेदपुर

मैंने धनबाद में फर्जी कोचिंग के मामले में उपायुक्त से जांच की मांग की थी. लेकिन जब उपायुक्त ने जांच नहीं की तो यह मामला जनसंवाद में ले गया. जनसंवाद में ले जाने के बाद आज तक इस मामले की सुनवाई नहीं हुई.

मनोज मिश्रा, धनबाद