क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: सिटी में परिवहन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही चरम पर है. सर्वोच्च न्यायालय की सड़क सुरक्षा तकनीकी समिति ने 6 माह पूर्व ही निर्देश जारी किया था कि हर पेट्रोल पंप पर स्वचालित प्रदूषण जांच केन्द्र खोला जाए, लेकिन इतने महीनों बाद भी किसी पेट्रोल पंप पर यह सुविधा शुरू नहीं की गई है. नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने भी फरवरी में ही इंडियन ऑयल समेत अन्य पेट्रोलियम कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर जल्द से जल्द प्रदूषण जांच केन्द्र खोलने के निर्देश दिए थे, लेकिन जांच केन्द्र नहीं खोले गए. विभागीय सूत्रों की मानें तो महकमे के अधिकारी अब मंथन में लगे हैं कि जल्द से जल्द इन केन्द्रों की शुरुआत कैसे की जा सके.

6 दिन का लिया था समय

नगर विकास मंत्री के साथ हुई बैठक में इंडियन ऑयल समेत अन्य पेट्रोलियम कंपनियों ने मात्र 6 दिन का समय लिया था और आश्वस्त किया था कि पेट्रोल पंप में प्रदूषण जांच केन्द्र की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन सारे दावे फेल हो गए हैं.

पूर्व एसडीओ ने चलाया था अभियान

रांची की पूर्व एसडीओ अंजलि यादव द्वारा अभियान चलाकर सिटी के कई प्रदूषण जांच केन्द्रों को सील किया जा चुका है. इन जांच केन्द्रों में वाहन को बिना देखे और जांच किए ही सर्टिफिकेट इश्यू कर दिए जा रहे थे. उन्होंने कचहरी चौक स्थित प्रदूषण जांच केन्द्र में छापामारी कर उसे सील कर दिया था और संचालक चंचल चटर्जी को सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के आरोप में जेल भी भेजा था.

धुर्वा व हरमू में खुलने हैं सीएनजी पंप

धुर्वा और हरमू में पांच सीएनजी पंप खोले जाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन वह मामला भी खटाई में पड़ा है. पेट्रोलियम कंपनियों का कहना है कि इन इलाकों में जमीन की दर ज्यादा है जिसके कारण पंप शुरु नहीं किया जा सका है.

क्या है सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश

सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट निर्देश है कि सभी पेट्रोल पंपों में प्रदूषण जांच केन्द्र खोले जाएं ताकि वहां पेट्रोल-डीजल भराने वाली गाडि़यों के प्रदूषण स्तर की जांच हो सके. इससे पर्यावरण को काफी हद तक बचाया जा सकता है और प्रदूषण भी कम किया जा सकता है.

वर्जन

अगले सप्ताह हमलोग पेट्रोलियम कंपनी के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और उन्हें जल्द से जल्द प्रदूषण केन्द्र खोलने के लिए निर्देश दिए जाएंगे. हमलोगों ने पूर्व में ही उन्हें कहा है कि सारे डिटेल और व्यय आदि का प्रस्ताव बनाकर विभाग को सौंपे. उसके अनुमोदन का प्रयास किया जाएगा, लेकिन अभी तक विशेष डेवलपमेंट नहीं हुआ है.

संजीव कुमार, डीटीओ, रांची