यह था मामला
मुरादनगर की रहने वाली मोनिका मेरठ कॉलेज में एमए सेकंड ईयर की छात्रा है. सोमवार को वह थाना लालकुर्ती पहुंची, जहां उसका आरोप था कि कॉलेज के तीन-चार छात्र उसके साथ छेड़खानी करते हैं और उससे अभद्र व्यवहार करते हैं. उसने प्रिंसीपल को भी शिकायत की थी, लेकिन जब उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की तो वह थाने आ गई. खास बात ये रही कि लालकुर्ती पुलिस ने भी इस छात्रा की मदद करने के बजाय उसको पहाड़ा पढ़ा दिया.

ये पुलिस है
थाने में पुलिस वालों ने छात्रा से प्रिंसीपल को एफिडेविट देकर आरोपी युवकों की डिटेल लाने के लिए कहा. वह थकहार थाने से भी चली आई. दरअसल, पुलिस किसी न किसी न बहाने से कार्रवाई से बचने का रास्ता तलाशती है. पहले तो कहते हैं कि कोई लड़की शिकायत नहीं करती. शिकायत करती है तो उसको टरका देते हैं. अब ऐसे कानून और अमेंडमेंट का क्या फायदा जिससे महिलाओं की सुरक्षा न हो सके. लड़कियों की सुरक्षा को लेकर आखिर कानून की धाराओं में बदलाव क्यों किए गए.

ये हुए बदलाव
1860 से चले आ रहे कानून आईपीसी (इंडियन पैनल कोड) की धारा 354 में स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग करना जैसी वारदातें आती थीं. इसके तहत आरोपी को एक वर्ष के लिए कारावास, जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने की सजा का प्रावधान था. साथ ही यह जमानतीय धारा भी थी. जिसमें आरोपी जमानत पर बाहर आ सकता था. दिल्ली में हुए दामिनी रेप केस के बाद कानून में खासे बदलाव हुए. धारा 354 में कई उपधाराएं तैयार की गईं.
- 354(क) इसके तहत अवांछनीय शारीरिक संपर्क और अग्रक्रियाएं या लैंगिक संबंधों की स्वीकृति बनाने की मांग या अनुरोध, अश्लील साहित्य दिखाना जैसी वारदातें आती हैं. वैसे तो यह बेलेबल है लेकिन इसमें कम से कम कारावास तीन वर्ष तक, जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान किया गया. इसी के तहत लैंगिक आभासी टिप्पणियों की प्रकृति का लैंगिक उत्पीडऩ भी जोड़ा गया. जिसमें आरोपी को एक वर्ष तक का कारावास हो सकेगा या जुर्माना या फिर दोनों.
- 354(ख) इसके तहत किसी महिला को विवस्त्र करने के आशय से स्त्री पर हमला या आपराधिक बल कर प्रयोग किया जाना. जिसमें आरोपी को कम से कम पांच वर्ष का कारावास, किंतु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना भी नियत किया गया. साथ ही यह धारा नॉनबेलेबल है.
- 354(ग) दृश्यरतिकता यानि किसी को घूरकर देखना. इसके तहत अगर किसी लड़की को कोई पंद्रह सेकंड घूरकर देख ले तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है. जिसमें कानून के तहत प्रथम दोष सिद्ध के लिए कम से कम एक वर्ष का कारावास, किन्तु जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना. इसमें जमानत हो सकती है. अगर यही व्यक्ति दुबारा ऐसी ही घटना के लिए दोषी पाया जाता है तो इसके लिए कम से कम तीन वर्ष का कारावास जो सात वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना भी. इसमें आरोपी की जमानत भी नहीं हो सकती.
- 354(घ) इसके तहत किसी लड़की या महिला का पीछा करना जैसी वारदातें शामिल हैं. जिसमें पहली बार अगर आरोपी पर दोष सिद्ध होता है तो उसको तीन वर्ष का कारावास और जुर्माना हो सकता है. वहीं अगर यही आरोपी दुबारा ऐसा करता है और उस पर दोष सिद्ध होता है तो इसके लिए पांच वर्ष तक का कारावास और जुर्माना हो सकता है. वहीं आरोपी की जमानत भी नहीं हो सकती.

सामने आने से डर लगता है, कहीं खुद का ही नाम बदनाम न हो जाए. समाज की मानसिकता इतनी बुरी हो चुकी है कि अब हर जगह लड़कियों को ही गलत सोचा जाता है. ऊपर से यदि कोई लड़की पुलिस को कम्पलेन करने भी जाती है तो उसे बदनामी के डर से घरवाले ही चुप्पी साधने पर दवाब बनाते हैं.
-स्वाति गौतम, दुर्गाबाड़ी स्कूल

फैमिली का सपोर्ट न हो तो फिर हम लोग कैसे अपनी आवाज को बुलंद करे.फैमिली वाले बस यहीं सोचकर चुप रह जाते है कि कहीं हम खुद ही न फंस जाए. या फिर किसी से दुश्मनी न कर बैठे.क्योंकि यहीं दुश्मनी आगे चलकर फैमिली वालों के लिए एंड उस लड़की के लिए मुसिबत भी बन सकती है.
-अंकिता गौतम, बीआईटी

पुलिस को कंप्लेन करने से भी इस तरह की घटनाएं रोकी नहीं जा सकती. पुलिस दस तरह के सवाल-जवाब करके बस चक्कर पे चक्कर ही कटवाती है. जिसमें समय की बरबादी के साथ ही नाम भी खराब होता है. क्योंकि सभ्य परिवारों में लड़कियों का बार बार पुलिस के पास जाना भी ठीक नहीं माना जाता.
-सुंबुल, इस्माईल डिग्री कालेज

आजकल माहौल काफी बिगड़ चुका है. जिसका परिणाम मुजफ्फरनगर कांड में देखा जा चुका है. उसमें भी लड़की के साथ हुई अभद्रता ने विकराल घटना का रुप लिया. और फिर बस माहौल आपसी रंजिश में बदल गया और फिर घटना ने साम्प्रदायिक दंगों का रुप ले लिया.
-अंजलि, आरजी पीजी कालेज

लड़कियां भले ही कितना ही सही हो पर इस तरह की घटना होने के बाद हमेशा लड़कियों पर ही इलजाम आते है. जिस लड़की के साथ घटना घटित होती है उसे बुरी नजरों से देखा जाता है और फिर समाज वाले भी यहीं कहते है कि कहीं न कहीं लड़की ही गलत होगी.
-ज्योति सैनी, इस्माईल कॉलेज