Figures Speak
- सिटी में सिर्फ एक मॉल है, जिसमें डेली 5-7 हजार लोगों की आवाजाही होती है।
- मॉल में मेन गेट अलावा पार्किंग की तरफ भी है एक रास्ता, जहां बिना किसी मशीनी चेकिंग के ही लोगों को अंदर जाने दिया जाता है
- सिक्योरिटी के लिए यहां पर 50 गार्ड्स हैं। इनमें पांच गनर, पांच बाउंसर, महिला गार्ड और सिक्योरिटी सुपरवाइजर शामिल हैं
- मेन गेट पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर है। 13 हैंड मेटल डिटेक्टर हैं, जिनसे इंट्री करने वालों की जांच पड़ताल की जाती है।
- मॉल में गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 32 सीसी कैमरे लगाए गए हैं।

पार्किंग गेट से घुसे, आराम से आ गए बाहर
आईनेक्स्ट टीम ने ट्यूजडे और वेंस्डे दो दिन लगातार सिटी माल का रियलिटी चेक किया। इस दौरान जो चीजें सामने आईं उनसे यह दावा तो किया जा सकता है कि मॉल में पब्लिक सेफ नहीं है। यहां संदिग्ध व्यक्ति आना और जाना काफी आसान है। कोई भी मॉल में प्री प्लान तरीके से किसी भी वारदात को आसानी से अंजाम दे सकता है।

समय दोपहर 12.44 बजे
पार्किंग में बाइक खड़ी करने के बाद रिपोर्टर अपने सहयोगी के साथ पार्किंग वाले गेट से भीतर पहुंचा। यहां पर एक महिला सिक्योरिटी गार्ड कुर्सी पर बैठी थी। दूसरा गार्ड भी चहलकदमी कर रहा था। आईनेक्स्ट टीम भी इसी रास्ते मॉल में प्रवेश कर गई। अंदर जाते समय सिक्योरिटी गार्ड ने चेक करना तो दूर, रोका तक नही। इससे सारे सुरक्षा इंतजाम की पोल खुल गई। सीढ़ी पर चलने के बाद वहां खड़े होकर रिपोर्टर ने अपने कैमरे से वीडियो बनाई। यह देखा गया कि वहां आने जाने वालों को कोई रोक नहीं रहा है। चेकिंग के नाम पर सिर्फ खानापूर्ती हो रही है।

तीन मिनट बाद
समय दोपहर 12: 47 बजे

आई नेक्स्ट टीम आराम से घूमते टहलते फस्र्ट फ्लोर पर पहुंच गई। वहां से सिटी मॉल के मेन गेट से भीतर आने वाले लोगों की चेकिंग की आब्जर्व करने लगे। इस दौरान यह नजर आया कि भीतर आने वालों की चेकिंग पर ज्यादा जोर नहीं दिया जा रहा है। किसी को चेक किया जा रहा तो किसी को यूं ही जाने दिया जा रहा है। महिलाओं की चेकिंग में भी लापरवाही नजर आई। केवल उनका बैग चेक किया जा रहा था। इसके अलावा इनकी कोई चेकिंग नहीं हो रही थी। इस पूरे आब्जर्वेशन में साफ हो गया कि मॉल में सुरक्षा के नाम पर होने वाली सघन जांच की जगह केवल चालीस- पचास सेकेंड में लोगों को चेक करने की खानापूर्ति की जा रही है।

दोपहर 12:49 बजे

फस्र्ट फ्लोर की गैलरी में रिपोर्टर ने देखा कि लोग आराम से घूम टहल रहे हैं। वहां मौजूद सिक्योरिटी की नजर एस्केलेटर पर ज्यादा है। सिक्योरिटी देख रही है कि सरकने वाली सीढिय़ों से चढ़कर ऊपर आने वाला कोई व्यक्ति गिर न जाए। वहां का हाल देखने के बाद टीम आराम से घूमती रही। बात करें सीसी कैमरों की तो उसकी मानीटरिंग की लापरवाही की पोल इसी से खुल गई कि किसी ने रिपोर्टर और उसके सहयोगी के बिना जांच पड़ताल आने पर कोई टोका टाकी नहीं। इतना ही नहीं, रिपोर्टर पूरे मॉल में एक संदिग्ध व्यक्ति की तरह कैमरे के साथ टहलता रहा, लेकिन किसी ने न कोई पूछाताछ की और न रोका।

ऐसे कोई टेररिस्ट होता तो क्या करते
इतना सीन देखकर आप समझ गए होंगे कि सिटी मॉल में आप अपने कितने सेफ हंै। जब रिपोर्टर की गतिविधियां किसी को नजर नहीं आई तो अनुमान लगा लीजिए कि किसी टेररिस्ट के भीतर घुसने के बाद क्या हाल होगा। चेकिंग और सिक्योरिटी अलर्ट कहीं से भी पुख्ता नहीं दिखाई दिए। सवाल है कि यदि कोई टेररिस्ट इस तरह से भीतर घुस जाए तो क्या करेंगे?

मेन गेट तक पर नहीं होती है चेकिंग
मॉल में करीब सवा घंटे घूमने के बाद रिपोर्टर अपने सहयोगी के साथ बाहर आ गया। इंट्री और एग्जिट प्वाइंट पर खड़े होकर टीम जाने- आने वालों पर नजर रखने लगी। इस दौरान चेकिंग की लापरवाही के साथ सबसे बड़ी खामी यह नजर आई कि डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर शांत खड़ा था। उसके भीतर से गुजरने पर कोई आवाज नहीं आ रही थी। उसकी हालत बता रही थी वह दम तोड़ चुका है। जब जिम्मेदार लोगों से इस मशीन के खराब होने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने दावा किया कि आज ही डीएफएमडी को ठीक कराया जाएगा। आई नेक्स्ट टीम वेंस्डे को दोबारा यह जांचने पहुंची कि मशीन स्टार्ट हो गई है या नहीं तो घोर लापरवाही सामने आई। मशीन अब भी खराब थी और मॉल के अंदर जाने वाले लोगों को केवल उनकी जेब टटोलकर ही जाने दिया जा रहा था।

न मैप, न इमरजेंसी प्लान
सिटी मॉल की सिक्योरिटी को लेकर कैंट पुलिस अलर्ट नजर नहीं आती। चेन स्नेचिंग और बाइक चोरी की वारदातों की वजह से शाम ढलने पर पुलिस मॉल के सामने नजर आती है। दिन में ऐसा कोई इंतजाम नहीं होता कि पुलिस यहां पर नजर रख सके। मॉल से करीब आठ सौ मीटर की दूरी पर पुलिस चौकी जटेपुर है। दो किलोमीटर पर थाना है। दो सौ कदम पर एसपी सिटी और एसपी देहात का आवास है। डेढ़ सौ मीटर पर फायर ब्रिगेड है। किसी विवाद की सूचना पर चौकी इंचार्ज और पांच- छह कांस्टेबल मौके पर पहुंचते हैं। कभी-कभार थाने की फोर्स भी आ जाती है। जटेपुर चौकी पर सिटी मॉल का कोई मैप मौजूद नहीं है, जबकि पुलिस और प्रशासन के अफसर हफ्ते में एक बार फैमिली के साथ मूवी देखने जरूर आते हैं। दोहपर में जहां पुलिस का कोई इंतजाम नहीं नजर आया। वहीं शाम को भी पुलिस वाले कहीं नजर नहीं आ रहे थे।

माल में चेकिंग तो होती है। छोटे मोटे बदमाशों से निपटने में ये सक्षम नजर आते हंै, लेकिन किसी बड़े मामले में ये टांय- टांय फिस्स हो जाएंगे।
सत्यपाल

इंट्री प्वाइंट पर जांच होती है, पर यह कहना मुश्किल है कि कोई भी टेररस्टि आसानी से इंट्री कर सकता है। जांच खानापूर्ति नजर आती है।
किरन सिंह

प्राइवेट सिक्योरिटी उस लेवल की नहीं होती कि वे टेरस्टि के हमले से निपट सकें। ऐसे में पुलिस को चाहिए कि अलग से इंतजाम रखें।
प्रशांत यादव

सिंगल बैरल बंदूक के सहारे कितनी सुरक्षा हो सकेगी। यहां पर पुलिस का परमानेंट इंतजाम होना चाहिए.
राज कमल सिंह

मैं तो अक्सर यहां आता हूं, सूर्ती, बीडी की चेकिंग के अलावा बाकी चीजों को गंभीरता से नहीं लिया जाता है।
दानिश लारी

हमारे स्तर से सिक्योरिटी का पूरा इंतजाम किया गया है। किसी इमरजेंसी में पुलिस आफीसर्स के साथ कंट्रोल रुम, आईजी, डीआईजी, डीएम और जिला अस्पताल को सूचना दी जाती है। असलहों के भीतर लेकर जाने में पूरी तरह से रोक है।

आरके बर्नवाल, सिक्योरिटी सुपरवाइजर

मेरे पास इस मुद्दे पर बात करने के लिए टाइम नही है। बाद में फुर्सत मिलेगी तब चर्चा की जाएगी। अभी मैं काम में बिजी हूं।
भवनाथ चौधरी, प्रभारी थाना कैंट

सिटी की सिक्योरिटी को लेकर हमने मीटिंग की है। मॉल की सिक्योरिटी पर नजर रखी जाती है। छोटी जगह पर मैप की जरूरत नहीं पड़ती है। यहां के बारे में पुलिस को पूरा आइडिया है।
प्रदीप कुमार, एसएसपी

report by : arun.kumar@inext.co.in