- मुख्यमंत्री के आदेश के बाद याद आए आश्रय ग्रह

- हकीकत को छिपाने की हो रही है कोशिश

आगरा. यूपी के देवरिया और बिहार के मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम्स में यौन शोषण का पर्दाफाश होने के बाद देशभर में हड़कंप मचा हुआ है. विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बना रखा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश भर के आश्रय ग्रहों की जांच पड़ताल किए जाने के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं. आनन-फानन में आश्रय गृहों की जांच-पड़ताल की गई, तो आगरा में करीब एक दर्जन आश्रय गृह ऐसे हैं, जो बगैर पंजीकरण के ही संचालित हैं. ऐसे में स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है. आखिर अवैध रूप (बिना पंजीकरण) से कैसे आश्रय गृह संचालित किए जा रहे हैं.

सवालों के घेरे में रिपोर्ट

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शहर में भी आश्रय गृहों की जांच पड़ताल कराई गई. जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार ने अपर जिलाधिकारी प्रशासन निधि श्रीवास्तव को इसकी जिम्मेदारी सौंपी. उन्होंने सात आश्रय गृहों का निरीक्षण कराया. सभी एसीएम ने रिपोर्ट अपर जिलाधिकारी प्रशासन को सौंपी है. अपर जिलाधिकारी ने बताया कि सभी आश्रय गृहों का निरीक्षण कराया गया है. कहीं पर कोई परेशानी की रिपोर्ट नहीं मिली है. लेकिन, हकीकत कुछ और ही है. करीब एक दर्जन ऐसे आश्रय ग्रह हैं, जो कि किशोर न्याय अधिनियम में पंजीकृत ही नहीं हैं.

ये नहीं हैं पंजीकृत

- मातृछाया न्यास, 80 बी, गांधी नगर

- मध्यानंद अनाथालय, यमुना ब्रिज

- मदर टेरेसा बाल गृह, सेंट एंथनी स्कूल के सामने

वर्ष 2015 में दिए थे आदेश

उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने वर्ष 2015 में आदेश जारी किया था कि सभी बाल संरक्षण गृहों की जांच कराई जाए. इसके बाद डीपीओ ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया. जिसने सभी आश्रय गृहों की जांच पड़ताल की. इसमें 11 आश्रय गृह ऐसे पाए गए, जो किशोर न्याय अधिनियम में पंजीकृत ही नहीं हैं. तब से इन 11 आश्रय ग्रहों में से केवल रामलाल वृद्धा आश्रम का ही पंजीकरण हो सका है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि देश के सभी बाल आश्रय गृह 31 दिसंबर 2017 तक किशोर न्याय अधिनियम में पंजीकृत हो जाने चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता है, तो ऐसे आश्रय ग्रहों में रह रहे आश्रितों को पंजीकृत आश्रय गृहों में शिफ्ट किया जाए.