होगी अच्‍छी बरसात तो गांवों से बढ़ेगी मांग
नई दिल्‍ली (प्रेट्र)।
बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच खराब रबी की फसलों की तुलना में इस बार अच्‍छी बरसात से ग्रामीण मांग में बढ़त देखने को मिल सकती है। ग्‍लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने अपने एक रिसर्च नोट में कहा है कि भारतीय मौसम पूर्वानुमान के बाद वे अपने अनुमान को लेकर अब ज्‍यादा आश्‍वस्‍त हैं कि 1 अगस्‍त के बाद होने वाली मौद्रिक समीक्षा में आरबीआई अपनी नीतिगत दरों में 25 आधार अंक की कटौती कर सकता है। ध्‍यान रहे कि मौसम पूर्वानुमान में कहा गया है कि औसत आंकड़ों के विश्‍लेषण से पता चलता है कि लंबे समय बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून के 97 फीसदी तक सामान्‍य रहने की उम्‍मीद है।

इस साल सामान्‍य मानसून का पूर्वानुमान
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, देश में इस साल सामान्‍य मानसून का अनुमान है। लांग पीरियड एवरेज (एलपीए) के मुताबिक इस बार मानसून के 97 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जून से सितंबर तक चार महीनों में मानसून सीजन के दौरान साल की 75 फीसदी बरसात होती है। जीडीपी का एक बड़ा हिस्‍सा इसी बरसात पर निर्भर रहता है, जो कृषि क्षेत्र के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है। देश के कई हिस्‍सों में खेती ने नुकसान झेला है लेकिन अब मानसून से उन्‍हें कुछ राहत मिलने की उम्‍मीद बढ़ गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रीष्‍म ऋतु में रबी की फसल अपेक्षाकृत ठीक नहीं रही। लेकिन 2018 की दूसरी छमाही में अच्‍छी बरसात से शरद ऋतु की खरीफ फसल के लहलहाने की उम्‍मीद है। इस बार सामान्‍य मानसून कृषि महंगाई दर को नीचे लाने में मददगार साबित होगा।

अगस्‍त से ही रेपो रेट 6 प्रतिशत पर
यदि अच्‍छी बरसात से कृषि महंगाई दर नियंत्रित रहती है तो 2018-19 के दौरान 4.3 फीसदी औसत महंगाई दर रहेगी। महंगाई दर का यह आंकड़ा आरबीआई के 2 से 6 प्रतिशत के तय दायरे में ही रहेगी। 2018-19 के पहले द्विमासिक समीक्षा में आरबीआई ने अपनी नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। रेपो रेट 6 प्रतिशत पर ही बना हुआ है। पिछले साल अगस्‍त के बाद से मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की यह लगातार चौथी द्विमासिक समीक्षा थी जब उसने अपनी नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया।

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