अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में दी गयीं एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां

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PRAYAGRAJ: उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से शुक्रवार को केन्द्र सभागार में राष्ट्रीय एकता एवं कौमी सद्भाव को समर्पित काव्य संध्या आजादी की गूंज का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि मेलाधिकारी विजय किरण आनंद व केन्द्र के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने दीप प्रज्जवलित कर समारोह का उद्घाटन किया। वाराणसी से आमंत्रित कवि डॉ। धर्म प्रकाश मिश्रा ने 'घुस कर मारा जैसे मारते ही जाओ इन्हें, अब इसी भांति प्रतिकार होना चाहिए। काश्मीर संग-संग पूरा पाक छीनकर, पाक में भी भारत सरकार होना चाहिए' पंक्तियां सुनाई तो श्रोताओं ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया।

कवियों ने सुनाई एक से बढ़कर एक पंक्तियां
लखनऊ के डॉ। नरेश कात्यायन की पंक्तियों 'मातृभूमि हित मौत बनाली सपनों की शहजादी, समरॉगण के मध्य रचाई रणधीरों ने शादी। तोड़ दिए घर में भी घर के गद्दारों के जबड़े, बलिदानों ने पर्व मनाया तब गूंजी आजादी' ने वाहवाही बटोरी। ताजवर सुलताना ने 'चमन में जब गुल खिला करेंगे, वहीं पे हम तुम मिला करेंगे। मिटाएंगे नफरतें दिलों की, यूं प्यार का सिलसिला करेंगे' पंक्तियां सुनाई। रवीन्द्र रवि ने 'नयन को मूंदकर सपने सलोने बो नहीं पाते, हैं जितने आज हम महफूज उतने हो नहीं पाते' पंक्तियां सुनाई। संचालन करते हुए डॉ। श्लेष गौतम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ताजा हालातों पर केन्द्रित पंक्तियां 'इन्हीं कमरों से अच्छी सोच के परचम निकलते थे, जहां से बम निकलते हैं कभी पीएम निकलते थे' सुनाई। मंच पर साक्षी तिवारी, पूनम श्रीवास्तव, वंदना शुक्ला, योगेन्द्र मिश्रा आदि कवियों ने भी पंक्तियां सुनाकर समां बांधा।