- दाउदपुर प्राथमिक विद्यालय का हाल, मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे छात्र

GORAKHPUR: गोरखपुर के सरकारी स्कूलों की तस्वीर सरकार के स्वच्छता मिशन को मुंह चिढ़ा रही है. शहर को ओपन डिफिकेशन फ्री (ओडीएफ) किए जाने के बड़े-बड़े दावों से फुर्सत मिले तो जिम्मेदारों को बेसिक शिक्षा विभाग के दाउदपुर प्राथमिक विद्यालय का हाल देखना चाहिए. दो कमरे के इस मॉडल स्कूल में में पढ़ने वाले 292 बच्चों के लिए आज तक टॉयलेट की व्यवस्था नहीं हो सकी है. दुखद तो ये कि टॉयलेट न होने के चलते यहां पढ़ने वाली कई बच्चियों ने स्कूल आना ही बंद कर दिया है.

खुले में जाना मजबूरी

दाउदपुर प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांचवी तक की पढ़ाई होती है. शिक्षा विभाग ने इस विद्यालय को मॉडल स्कूल का दर्जा दिया है. लेकिन यहां लंबे समय से टॉयलेट की व्यवस्था नहीं हो सकी है. प्रधानाध्यापिका कई बार बीएसए से टॉयलेट निर्माण की गुहार लगा चुकी हैं लकिन विभाग के उदासीन रवैए के कारण यहां के बच्चों को खुले में ही शौच के लिए जाना पड़ता है. टॉयलेट न होने की इस दिक्कत का नतीजा ये कि धीरे-धीरे यहां की कई गर्ल स्टूडेंट्स ने स्कूल आना ही बंद कर दिया है.

100 प्रतिशत नामांकन लेकिन मदद जीरो

दाउदपुर प्राथमिक विद्यालय में टॉयलेट की कमी के अलावा भी दिक्कतों की कमी नहीं है. इस सत्र में प्रधानाध्यापिका इंद्रावति सिंह व सहायक अध्यापिका गरिमा शाही के प्रयास से स्कूल में शत प्रतिशत नामांकन कराया गया है. अब तक 292 छात्रों को नामांकन हो चुका है. प्रधानाध्यापिका अपनी तनख्वाह से डेढ़ लाख रुपए से ऊपर के बजट से विद्यालय के भीतर टाइल्स और रंग रोगन का कार्य करा चुकी हैं. साथ ही छात्रों के लिए किताब व कॉपी की भी मदद करती रहती हैं. लेकिन विभाग की तरफ से न तो संसाधन मुहैया कराए गए और ना ही टॉयलेट व दोपहर के भोजन के लिए रसोई घर की इंतजाम किया गया है. आलम ये कि छात्रों के लिए मिड डे मील बगल के मंदिर परिसर में बनाया जाता है. वहीं बच्चों को शौच के लिए बाहर नालियों व सड़कों का सहारा लेना पड़ता है. ब्वॉयज तो किसी तरह काम चला भी लेते हैं लेकिन छात्राएं किसी तरह छुट्टी तक का समय काटने को मजबूर रहती हैं.

बॉक्स

केवल दिखावे के लिए आते अधिकारी

तमाम सरकारी कार्यक्रमों के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल के छात्रों का इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन उनकी मूलभूत सुविधाओं का ख्याल रखने की फुर्सत किसी को नहीं है. स्कूल में बेंच आ गए हैं लेकिन कमरे में कैसे रखा जाएगा, इसकी खोज खबर रखने वाला कोई जिम्मेदार नहीं है. इस सत्र में इतने ज्यादा नामांकन हो गए हैं कि बच्चों को दो कमरे में बैठाना भी दोनों शिक्षिकाओं के लिए मुश्किल हो गया है. कोई पेड़ के नीचे बैठाकर पढ़ाता है तो कोई उमस भरे छोटे कमरे में 100 बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूर है.

इस क्लास में इतने छात्र

क्लास छात्र

एक 58

दो 82

तीन 74

चार 56

पांच 22

कुल 292

वर्जन

दाउदपुर प्राथमिक विद्यालय में जगह की कमी है. इसके लिए पार्षद से जगह की मांग की गई है. लेकिन अभी तक जगह नहीं मिल सकी है. कोशिश है कि रसोई व टॉयलेट के लिए जगह की तलाश जल्द पूरी कर ली जाए.

- ब्रह्मचारी शर्मा, बीएसए