- रेरा से खौफजदा बिल्डर्स ने बदल लिये अपने फोन नंबर

- पते भी बदले, रेरा से भेजी गई नोटिस आ रही वापस

LUCKNOW : रेरा से नहीं फोन कॉल से डर लगता है! प्रदेश में कुकुरमुत्ते की तरह प्रदेश में उग आए बिल्डर्स या कोलोनाइजर्स का फिलवक्त यही हाल है। वजह भी साफ है, इन छुटभैय्ये बिल्डर्स से परेशान आवंटी रेरा (यूपी रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) का दरवाजा खटखटा रहे हैं। लेकिन, जब रेरा से इन्हें तलब करने के लिये कॉल की जा रही है तो पता चल रहा है कि इनके नंबर ही बदल चुके हैं। रेरा के खौफ का आलम यह है कि इनमें से कईयों ने तो अपने पते भी बदल लिये हैं। नतीजतन, रेरा द्वारा भेजी गई नोटिस बिना डिलीवर हुए बैरंग वापस लौट रही हैं।

रिमोट सेंसिंग के जरिए ढूंढे गए

आजकर हर किसी की चाहत है कि उसका एक छोटा सा मकान हो। इसी चाहत को भुनाने के लिये प्रदेश भर में छुटभैय्ये बिल्डर या कोलोनाइजर्स पनप आए हैं। यह बिल्डर या कोलोनाइजर्स जमीनों में प्लॉटिंग या फिर फ्लैट्स बनाकर बेचने का दावा कर लोगों से रकम ऐंठ लेते हैं। रेरा ने रिमोट सेंसिंग के जरिए ऐसे 106 प्रोजेक्ट्स चिन्हित किये जिन्हें ऐसे छुटभैय्ये बिल्डर्स या कोलोनाइजर्स डेवलप कर रहे थे। इनसे मौके पर उनकी डिटेल ली गई। जिसमें मोबाइल नंबर व पता शामिल था।

बदल लिये नंबर

इन छुटभैय्ये बिल्डर्स या कोलोनाइजर्स से परेशान सैकड़ों आवंटियों की शिकायतें हर रोज रेरा को मिल रही हैं। इन शिकायतों पर रेरा कार्रवाई करना भी चाह रहा है लेकिन, वह भी बेबस है। दरअसल, इन बिल्डर्स या कोलोनाइजर्स ने जो जानकारियां दीं, वे गलत निकल रही हैं। आलम यह है कि इस तरह की शिकायतों की सुनवाई करने वाले ऐसे बिल्डर्स या कोलोनाइजर्स को कॉल करते हैं लेकिन, सिर्फ 15 फीसद नंबरों पर ही घंटी बजती है। यानी बाकी बचे 85 फीसद ने या तो नंबर बंद कर दिये या फिर नंबर ही बदल लिये।

बॉक्स

पेश आ रही हैं दिक्कतें

रेरा के सचिव अबरार अहमद ने बताया कि रेरा में आने वाली शिकायतों पर बिल्डर्स, कोलोनाइजर्स को ई-मेल, उनके पते या फिर मोबाइल नंबर पर नोटिस भेजकर शिकायतों की सूचना दी जाती है। उन्होंने बताया कि रेरा की सख्ती की वजह से कई बिल्डर्स अपने प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं वहीं, बड़े पैमाने पर शिकायतें भी आ रही हैं। पते व मोबाइल नंबर बदलने के चलते बिल्डर के न मिलने से आदेशों के अनुपालन में खासी दिक्कतें पेश आ रही हैं।