- शासन से मिलने वाले बजट की लागत बढ़ने पर होगी जांच

- बनाई गई है कमेटी बनाई, शासन के अधिकारियों के साथ ही यूनिवर्सिटी इंजीनियर भी होंगे मेंबर

- कार्यदायी संस्था को देना होगा ऑथेंटिक प्रूव और कमेटी को करना होगा कनवेंस

GORAKHPUR: उच्च शिक्षा आयोग के फंड में जिम्मेदार झोलझाल नहीं कर पाएंगे. कार्यदायी संस्था चाहकर भी बजट बढ़ा नहीं सकेगी, वहीं अगर लागत बढ़ती है तो उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ेंगे. उच्च शिक्षा विभाग के अंडर आने वाली यूनिवर्सिटीज में बजट से ज्यादा खेल भी नहीं हो सकेगा और एक पैसा एक्स्ट्रा खर्च भी नहीं कर सकेंगे. अगर ऐसा हो भी जाता है तो उसकी जांच के बाद ही पेमेंट किया जाएगा. रिवाइज इस्टीमेट को वेरिफाई करने के लिए शासन ने हाई लेवल कमेटी फॉर्म की है, जिसमें विशेष सचिव उच्च शिक्षा को अध्यक्ष बनाया गया है. इसके अलावा कमेटी में यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि समेत कुल पांच मेंबर होंगे.

लेट के बाद हो जाता है रिवाइज

यूनिवर्सिटी में शासन से मिलने वाले बजट का इस्तेमाल तो खूब होता है, लेकिन यहां पर चलने वाली परियोजनाएं लेट लतीफी की भेंट चढ़ जाती हैं. अक्सर ऐसा होता है कि कार्यदायी संस्था तय समय पर काम पूरा नहीं करती, जिसके बाद रिवाइज इस्टीमेट बनाकर वह बजट की मांग करने लगते हैं. यूनिवर्सिटी में चल रहे स्टेडियम के कंस्ट्रक्शन में भी ऐसा ही देखने को मिला है. जहां कार्यदायी संस्था की लेट लतीफी की वजह से इतनी देर हो गई है कि अब तक इसका काम पूरा नहीं हो सका है और इसकी लागत भी काफी बढ़ गई है. लेकिन बजट अप्रूव न होने से अब तक काम अटका पड़ा हुआ है.

करना हाेगा कनवेंस

बजट बढ़ने या लेट लतीफी की कंडीशन में कार्यदायी संस्था को काफी पापड़ बेलने पड़ेंगे. संस्था को जहां काम में देर होने की जहां वाजिब वजह बतानी होगी. वहीं, इसके लिए उन्हें कमेटी मेंबर्स को भी कनवेंस करना होगा कि जो देर हुई है, वह जानबूझकर नहीं की गई है. वहीं जो बजट बढ़ रहा है वह उनकी गलती से नहीं बढ़ा है. साथ ही उन्हें यह भी प्रूव करना होगा कि जो बजट बढ़ रहा है वह परिस्थितियों की वजह से बढ़ रहा है, न कि संस्था की गलती से, इसके सैटिस्फैक्शन के बाद ही कार्यदायी संस्था को एक्सेस बजट जारी ि1कया जाएगा.

यह हैं कमेटी मेंबर्स

विशेष सचिव उच्च शिक्षा

अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव वित्त

प्रमुख अभियंता, लोक निर्माण विभाग की ओर से नामित प्रतिनिधि

कार्यदायी संस्था के अधीक्षण अभियंता

संबंधित यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के यूनिट प्रभारी

पांच फर्म को करोड़ाें का काम

यूनिवर्सिटी को रूसा के तहत साढ़े सात करोड़ रुपए मिले हैं. इसको कब, कैसे और कहां यूटिलाइज करना है, यूनिवर्सिटी ने इसकी तैयारियां कंप्लीट कर ली हैं. पांच फर्म को करोड़ों रुपए के काम सौंप दिए गए हैं. इसमें जहां टॉयलेट रेनोवेशन का काम अगल फर्म को दिया गया है, वहीं नए टॉयलेट बनाने की जिम्मेदारी दूसरी फर्म के पास है. क्लासरूम रेनोवेशन के साथ ही कैंटीन और बिल्डिंग को दुरुस्त करने का जिम्मा अलग फर्म के पास है. वहीं एकेडमिक ब्लॉक को सुधारने का काम अगल फर्म करेगी, तो हॉस्टल की मरम्मत अलग फर्म के ि1जम्मे है.

5 लाख से दो करोड़ तक के काम

यूनिवर्सिटी में होने वाले व‌र्क्स कम से कम 5 लाख रुपए की लागत से होंगे, जबकि मैक्सिमम पेमेंट यूनिवर्सिटी दो करोड़ रुपए करेगी. इसमें कैंटीन के मद में यूनिवर्सिटी ने पांच लाख रुपए बजट रखा है. वहीं, क्लासरूम रेनोवेशन के साथ ही दूसरे मरम्मत के मद में यूनिवर्सिटी ने 70 लाख रुपए बजट अलॉट किया है. आर्ट फैकेल्टी के टॉयलेट के रेनोवेशन में यूनिवर्सिटी 30 लाख रुपए खर्च करेगी. दो करोड़ की लागत से यूनिवर्सिटी कैंपस, हॉस्टल और एडी बिल्डिंग में जरूरत के मुताबिक टॉयलेट बनाए जाएंगे. डिजिटाइजेशन के लिए 40 लाख का बजट दिया गया है.

किसको किसका जिम्मा

आवास विकास परिषद - रेनोवोशन ऑफ टॉयलेट

आवास विकास परिषद - क्रिएशन ऑफ टॉयलेट

यूपीपीसीएल - क्लासरूम रेनोवेशन

यूपीपीसीएल - रेनोवेशन

यूपीपीसीएल - कैंटीन

यूपीडेस्को - डिजिटाइजेशन

आरईएस - एकेडमिक ब्लॉक रेनोवेशन

सी एंड डीएस - हॉस्टल रेनोवेशन