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PATNA: बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा कि प्रदेश में शिशु मृत्यु दर पर काबू पाने में काफी हद तक सफलता मिली है. सरकार के अवेयरनेस कार्यक्रम से लोग अलर्ट हुए हैं और टीकाकरण से लेकर अन्य सावधानी बरत रहे हैं. यही कारण है कि नवजात को सुरक्षा मिल रही है. वह शुक्रवार को सेंटर फॉर इकनोमिक पालिसी एंड प?िलक फिनांस, आद्री की तरफ से आयोजित दो दिवसीय अन्तर राष्ट्रीय कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र में चीफ गेस्ट के रुप में बोल रहे थे.

साल दर साल घटी मृत्यु दर

उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बताया कि राज्य में शिशु मृत्यु दर 2005 की 61 से घट कर 2016 में प्रति एक हजार पर 38, मातृ मृत्यु दर 2007-09 की 261 से घट कर 2014-16 में 165 हो गई जबकि शिशु मृत्यु दर का राष्ट्रीय औसत 34 और मातृ मृत्यु दर 130 है. 2005-06 में जहां बिहार की प्रजनन दर 4 प्रतिशत थी वहीं 2015-16 में घट कर 3.4 प्रतिशत हो गई. उन्होने कहा कि संस्थागत प्रसव राष्ट्रीय औसत 75 की तुलना में बिहार में 76 प्रतिशत तथा प्रसव पूर्व जांच राष्ट्रीय औसत के समतुल्य है.

विकास दर में आई तेजी

'सेंटर फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी एंड प?िलक फिनांस, आद्री' की ओर से आयोजित 'प?िलक फिनांस: थ्योरी, प्रैक्टिस एंड चैलेंजेज' के उद्घाटन सत्र में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त आयोग व एफआरबीएम मानकों पर कुशल वित्तीय प्रबंधन से बिहार की विकास दर राष्ट्रीय औसत 7 की तुलना में पिछले एक दशक से 10 प्रतिशत बनी हुई है. बजट आकार 2005-06 के 26,328.67 करोड़ से 7 गुना बढ़ कर 2018-19 में 1,76,990 करोड़ हो गया है. राजकोषीय घाटे को 3 फीसदी तक सीमित रखने में सफलता मिली है. साथ ही उन्होंने कहा कि राजस्व संग्रह में 7 गुना वृद्धि हुई है.

बीपीएल में भी आई कमी

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि तेंदुलकर पद्धति के आधार पर बिहार में 2004-05 की तुलना में बीपीएल की संख्या 54.4 से घट कर 2011-12 में 33.7 प्रतिशत हो गई. साक्षरता दर में राष्ट्रीय स्तर पर 9.2 जबकि बिहार में 16.8 प्रतिशत की वृद्वि हुई है. प्रति व्यक्ति आय 2004-05 की 21,174 से बढ़ कर 2016-17 में 38,546 हो गई है. उन्होने कहा कि चावल उत्पादन में 2005-06 की तुलना में 2017-18 में 135 प्रतिशत, गेहूं में 116 व मक्का में 184 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. हवाई उड़ानों की संख्या 2004-05 की 3,844 से बढ़ कर 2016-17 में 15,508 और यात्रियों की संख्या 1.76 लाख से बढ़ कर 35 लाख प्रतिवर्ष हो गई है.

बिजली से भी रोशन हुए क्षेत्र

डिप्टी सीएम ने कहा कि सभी गांवों व 1,06,249 बस्तियों में बिजली पहुंचने के बाद 2005 की 24 लाख विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या 2018 में बढ़ कर 1 करोड़ 27 लाख हो गई हैं. 2007-08 की 1.56 लाख की तुलना में 2017-18 में 4.5 गुना अधिक 7.13 लाख साइकिल छात्रों को वितरित की गई. सभी जिलों में इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्नीक, महिला आईटीआई, जेएनएम, पारा मेडिकल खोलने के साथ ही 13 नए मेडिकल कॉलेज व सभी मेडिकल कॉलेजों में नसिंग ट्रेनिंग सेंटर खोलने का निर्णय लिया गया है.