कैटेगरी 2 के मरीज को मिलेगा अब 6 महीने इलाज

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने टीबी के उपचार की कई नीतियों में किया बदलाव

MEERUT । टीबी के हर मरीज की अब सीबी नेट जांच कराई जाएगी। इसके साथ ही इस जांच के आधार पर मरीज का उपचार किया जाएगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने टीबी के उपचार की कई नीतियों में बदलाव किया है। जिसके तहत यह नई गाइडलाइन जारी की गई है। इसके साथ ही मरीजों की कैटेगरी में भी बदलाव किया गया है।

अब 6 महीने का इलाज

टीबी के मरीजों को अभी तक चार श्रेणियों में रखा जाता था। जिनमें पहली कैटेगरी जनरल मरीजों की थी। इनका इलाज 6 महीने चलता था। दूसरी कैटेगरी ऐसे मरीजों की थी जिन्होंने पहले कभी भी टीबी का इलाज लेकर छोड़ दिया हो, इनका इलाज 8 महीने चलता था। तीसरी कैटेगरी एमडीआर मरीजों की जबकि चौथी कैटेगरी एक्सडीआर मरीजों की थी। नई गाइडलाइन के तहत अब मरीजों की सिर्फ तीन कैटेगरी होंगी। दूसरी कैटेगरी को खत्म कर पहली कैटेगरी में ही शामिल कर लिया गया है। इसके तहत अब इन मरीजों को 8 महीनों की जगह 6 महीने ही इलाज दिया जाएगा।

आसान होगी पहचान

सीबी नेट जांच जरूरी होने से अब सेंसेटिव और रेजिस्टेंट टीबी मरीजों की पहचान आसानी से हो जाएगी। इससे शुरुआती इलाज में भी काफी मदद मिलेगी और यह आसान रहेगा। इस जांच के तहत पुराने मरीजों में आर व एस की स्थिति से उसका फ‌र्स्ट लाइन एलपीए भेजना जरूरी होगा। जिससे मरीज में सामान्य या एमडीआर के लक्षणों की जांच की जा सकेगी ।

ये भी अनिवार्य

- पूर्व उपचारित टीबी मरीजों के इलाज में 2 महीने एचआरजेडई व 4 महीने एचआरई दिया जाएगा।

- अगर किसी पूर्व उपचारित मरीज में फ‌र्स्ट लाइन एलपीए नहीं मिलता है तो उसका इलाज तुरंत किया जाएगा।

- अगर किसी पूर्व उपचारित मरीज का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है तो रिजल्ट का इंतजार नहीं करना है। उसका इलाज तत्काल शुरु किया जाएगा।

नई नीतियों को हमने लागू कर दिया है। अब कैटेगरी टू के मरीजों का इलाज भी सामान्य मरीजों की तरह किया जा रहा है।

डॉ। एमएस फौजदार, जिला टीबी अधिकारी, मेरठ