-अभी अफसरों और एंबुलेंस से जुड़े जिम्मेदारों के पास ही थी सुविधा

-रिस्पांस टाइम कम करने के लिए डिस्ट्रिक्ट को मिली 16 नई एंबुलेंस, जल्द होगा इनॉग्रेशन

27-एंबुलेंस हैं 108

43-एंबुलेंस हैं 102

2-एएलएस एंबुलेंस हैं

BAREILLY : एंबुलेंस कितनी देर में हॉस्पिटल पहुंच रही है, कितनी देर में मरीज के पास पहुंचेगी। इसके लिए अफसर मोबाइल एप से निगरानी कर रहे हैं। इसके साथ 108 और 102 एंबुलेंस से जुड़े कर्मचारी भी जानकारी ले रहे हैं। अभी यह सुविधा अफसरों और कर्मचारियों के लिए शुरू की गई है लेकिन जल्द ही मरीज और तीमारदार भी अपने मोबाइल फोन पर एंबुलेंस की लोकेशन देख सकेंगे। इसके लिए विभाग ने पूरी तैयारी भी कर ली है जल्द ही यह सुविधा पब्लिक के लिए भी शुरू हो जाएगी।

रेस्पांस टाइम होगा कम

एंबुलेंस का रेस्पांस टाइम कम करने के लिए यह कवायद की गई है। मरीज को समय से एम्बुलेंस मिल सके इसके लिए भी यह एप तैयार किया गया है। सभी एंबुलेंस को जीपीएस से लैस कर एप से जोड़ा गया है। एप से जब मरीज के तीमारदार को एंबुलेंस की लोकेशन दिखने लगेगी तो वह बार-बार फोन करके एंबुलेंस के बारे में अपडेट नहीं लेगा। इससे जानकारी देने वाला कर्मचारी भी डिस्टर्ब नहीं होगा साथ ही तीमारदार को भी सुविधा होगी।

ऐसे मिलेगी जानकारी

प्रोग्राम मैनेजर इन्द्रजीत सिंह ने बताया कि 108 एंबुलेंस और 102 एंबुलेंस के नाम से एप बनाए गए हैं, जिससे अभी एंबुलेंस से जुड़े कर्मचारी और अफसर निगरानी कर रहे हैं। एप में और अपडेट किया जा रहा है। अपडेट हो जाने के बाद पब्लिक और तीमारदार भी एंबुलेंस की लोकेशन ले सकेंगे। एप अपडेट होने के बाद 108 या 102 नंबर पर कॉल करने के बाद मरीज या तीमारदार अपने मोबाइल पर एंबुलेंस की लोकेशन देख सकेंगे। इससे उन्हें आसानी से अंदाजा लग जाएगा कि एंबुलेंस कितनी देर में उन तक पहुंच जाएगी।

यह होती है समस्या

कई बार कॉल करने के काफी देर बाद भी एंबुलेंस मरीज तक नहीं पहुंचती है, जिससे मरीज को समय से इलाज नहीं मिल पाता है। ऐसे में मरीज या तीमारदार को बार-बार फोन करना पड़ता है, लेकिन फोन रिसीव करने वाला व्यक्ति भी उन्हें एंबुलेंस की सही लोकेशन नहीं बता पाता था। अब एप की सुविधा शुरू होने के बाद यह समस्या खत्म हो जाएगी।

मोबाइल एप के जरिए एंबुलेंस की पूरी लोकेशन हम लोग ले रहे हैं। जल्द ही पब्लिक को भी सुविधा दी जाएगी, ताकि, एंबुलेंस के बारे में मरीज और तीमारदार भी लोकेशन ले सकें।

इंद्रजीत सिंह, प्रोग्राम मैनेजर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल