-स्टूडेंट्स से बोले सीएम नीतीश कुमार, मन में कोई भ्रम मत रखिए, योजना का लाभ लेकर पढि़ए

-सीएम ने स्टूडेंड क्रेडिट कार्ड के स्वीकृत राशि के ऑनलाइन ट्रांसफर का किया शुभारंभ

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क्कन्ञ्जहृन्: बिहार के बाहर से मैट्रिक या इंटर पास करने वाले बिहारी मूल के स्टूडेंट्स को भी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड (एससीसी) का लाभ मिलेगा. अभी तक सिर्फ बिहार से मैट्रिक-इंटर करने वाले स्टूडेंट्स को ही इसका लाभ मिलना था. अधिवेशन भवन में शनिवार को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम से स्वीकृत शिक्षा ऋण के ऑनलाइन ट्रांसफर योजना के शुभारंभ पर सीएम नीतीश कुमार ने ये बातें कही. सीएम ने कहा कि वैसे स्टूडेंट्स की संख्या काफी है जो बिहार के हैं पर अपनी पढ़ाई झारखंड, पश्चिम बंगाल या यूपी में की है. ऐसे स्टूडेंट्स को भी बिहार की एससीसी योजना का लाभ मिलेगा.

उच्च शिक्षा में मिले अवसर

सीएम ने कहा कि स्टूडेंट्स क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से हमारी कोशिश उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बिहार के स्टूडेंट्स को बढ़ावा देना है. बारहवीं के बाद आगे की पढ़ाई करने में गरीबी आड़े आ जाती है. इसी को ध्यान में रख सात निश्चय के तहत स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की योजना बैंकों के माध्यम से आरंभ की गई है. सौ फीसदी की जगह बिहार सरकार ने 160 फीसदी की गारंटी दी. बैंकों के साथ सहमति पत्र पर भी हस्ताक्षर हुआ पर बैंकों ने एमओयू को नहीं माना और कोई सहयोग नहीं किया.

ब्याज दर दुनिया में सबसे कम

जबकि डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने कहा कि बिहार सरकार विद्यार्थियों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के तहत शिक्षा ऋण जिस ब्याज दर पर उपलब्ध करा रही है उस ब्याज दर पर कोई ऋण दुनिया में कहीं भी उपलब्ध नहीं है. मोदी ने कहा कि जब बैंकों द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षा ऋण दिया जाता है तो ब्याज दर 10.25 प्रतिशत होती है. वहीं बिहार सरकार मात्र 4 परसेंट की ब्याज दर पर शिक्षा ऋण उपलब्ध करा रही है.

लड़कियों को एक फीसदी देना है ब्याज

लड़कियों को मात्र एक प्रतिशत का ब्याज देना है जबकि बैंकों द्वारा लड़कियों को तय दर में 0.25 प्रतिशत की छूट दी जाती है. बैंकों में ऋण लौटाने का सिस्टम यह है कि वे पढ़ाई पूरा होने के एक साल बाद सामान्य और फिर उसके पश्चात कंपाउंड इंटरेस्ट लेते हैं जबकि राज्य सरकार का शिक्षा वित्त निगम कंपाउंड इंटरेस्ट नहीं लेता है. ऋण तब तक वापस नहीं करना है जब तक कोई रोजगार नहीं मिले. डिप्टी सीएम ने कहा कि पूरे देश में बिहार पहला राज्य है जहां इतने बड़े पैमाने पर सरकारी खजाने से पढ़ने के लिए कर्ज दिया जा रहा है. यही नहीं 36 से 60 हजार रुपए का ऋण रहने और खाने पर होने वाले खर्च के लिए भी दिया जा रहा है. बैंकों द्वारा इस प्रकार की कोई सुविधा नहीं दी जाती है. स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड मद में इस वर्ष सरकार ने 550 करोड़ आवंटित किए हैं.

तो माफ भी कर देंगे लोन

बैंकों की बेरुखी की वजह से यह तय किया गया कि शिक्षा वित्त निगम बनाया जाए. शिक्षा ऋण हासिल करने की प्रक्रिया सहज बनाया गया. अगर कोई चार प्रतिशत की ब्याज दर पर भी लोन नहीं लौटाता है तो उसे हम माफ कर देंगे. मेरी इच्छा है कि बच्चे पढ़ें. अब पर्याप्त संख्या में आवेदन आने लगा है.

बुलंदी से पढि़ए, मनोबल ऊंचा रखिए

अगर किसी विद्यार्थी को कोई छात्रवृत्ति मिल रही है तो भी उन्हें स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड का लाभ मिलेगा. छात्रवृत्ति अपनी जगह पर है. सीएम ने मौजूद स्टूडेंट्स से कहा कि मन में कुछ मत सोचिए. पढ़ाई के लिए लाभ लीजिए. युवा पीढ़ी आगे बढ़ जाएगी तो बिहार के गौरव को हम फिर से स्थापित कर पाएंगे.

क्रेडिट कार्ड से सपने साकार करेंगे बच्चे

वहीं शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के तहत मिलने वाले शिक्षा ऋण से बच्चे अपने सपनों को साकार कर पाएंगे. इसका उन्हें लाभ मिलेगा. मुख्य सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त शशि शेखर शर्मा, वित्त विभाग के प्रधान सचिव सुजाता चतुर्वेदी, शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चंद्रा, मनीष कुमार वर्मा, सचिव वित्त (व्यय) राहुल सिंह, शिक्षा सचिव आरएल चोंगूथू और राज्य शिक्षा वित्त निगम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी जयंत सिंह मौजूद थे.