स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए निर्देश, अस्पतालों को करनी होगी शव वाहन की व्यवस्था

Meerut. सरकारी अस्पतालों में मरीज की मौत के बाद शव ले जाने के लिए तीमारदारों को अब इधर-उधर नहीं भटकना होगा. शव ले जाने के लिए वाहन प्रोवाइड करवाने की जिम्मेदारी पूरी तरह से अस्पताल व स्वास्थ्य विभाग की होगी. अगर वाहन उपलब्ध नहीं हुआ तो विभाग पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

शव वाहन की व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने सभी सरकारी अस्पतालों और सीएचसी व पीएचसी पर शव वाहन उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं. मरीज की मौत अगर रास्ते में होती है, तब भी शव घर पहुंचाने का इंतजाम स्वास्थ्य विभाग को ही करना होगा. अगर किसी वजह से शव वाहन उपलब्ध नहीं हुआ तो स्वास्थ्य विभाग व अस्पताल प्रशासन को तीन घंटे के अंदर वाहन की व्यवस्था करनी होगी. अगर कहीं भी कंधे, ठेली, रिक्शा आदि पर शव ढोए जाने की शिकायत मिली तो अस्पताल प्रशासन और सीएमओ की जवाबदेही होगी. साथ ही संबंधित पर कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी.

सीएमओ करेंगे मॉनिटिरिंग

तीमारदार अपने परिजन के शव को कंधे पर न ले जाएं इसकी पूरी मॉनिटिंरिंग सीएमओ करेंगे. शवों की दुर्गति न हो, शव वाहनों की स्थिति, शव वाहन समय से उपलब्ध कराएं जाए आदि की सूचना व रिपोर्ट भी स्वास्थ्य विभाग को ही रखनी होगी. इसके अलावा अगर तीमारदार शव को खुद ले जाना चाहता है, तो उसे विभाग को लिखित में लेटर देना होगा. शव वाहनों की सुविधा सरकारी एंबुलेंस की तरह फ्री मिलेगी. फिलहाल मेडिकल कॉलेज में 4 व जिला अस्पताल में 2 शव वाहन मौजूद हैं.

हमारे यहां शव वाहन मौजूद हैं. सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन करवाया जा रहा है.

डॉ. पीके बंसल, एसआईसी, जिला अस्पताल

हमारे यहां 4 शव वाहन हैं. एक वाहन में दो शव रखने की कैपेसिटी हैं.

डॉ. अजीत चौधरी, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज