-सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपने बच्चों का नहीं कराया सरकारी स्कूलों में दाखिला

-हाईकोर्ट के आदेश के करीब दो साल पहले अधिकारियों व कर्मचारियों को एडमिशन कराने का दिया था आदेश

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ALLAHABAD: परिषदीय स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. करीब दो साल पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का निर्देश दिया था. हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी अभी तक सरकारी कर्मचारियों ने अपने बच्चों का एडमिशन इन स्कूलों में नहीं कराया. सवाल उठता है कि जब अधिकारी और कर्मचारी अपने ही बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में नहीं कराते तो दूसरे के बच्चों का एडमिशन किस आधार पर कराने की बात करते हैं?

अपने बच्चों के लिए पसंद नहीं

सूबे में अधिकारी और कर्मचारी तो अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाते ही नहीं. बल्कि खुद सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक भी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में ही पढ़ने भेजते हैं. यही कारण है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के बच्चों की संख्या भी सरकारी स्कूलों में न के बराबर है.

यह बात सही है कि हमें भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहिए. इसके लिए हम सभी को शुरुआत करने की जरूरत है. तभी लोगों तक यह संदेश जा सकेगा.

-रामअवतार गुप्ता

ऐसे में सबसे पहले सरकारी स्कूलों के अध्यापकों पर कार्रवाई होनी चाहिए. अगर वो अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में भेजें तो हालात खुद-ब-खुद सुधरेंगे.

-निशांत दुबे

इसमें मैं पूरी तरह से सरकार को दोषी मानता हूं. इसके लिए सरकार को कड़े नियम बनाने चाहिए, ताकि हालात सुधर सकें. बदतर व्यवस्था होने के चलते ही माता-पिता अपने बच्चों को इन स्कूलों में नहीं पढ़ाते.

-नीरज विमलारोशन पटेल

अगर देखा जाए तो गवर्नमेंट स्कूल में भी प्राइवेट स्कूल से कम पैसा नहीं लगाया जाता है. लेकिन कभी कोई जांच होती है और ना कोई सर्वे. गवर्नमेंट और लोकल एरिया के लोगों की जागरूकता ही सही कदम होगा.

-उज्ज्वल मिश्रा

स्कूलों की मरम्मत ठीक से नहीं होती है. पढ़ने का माहौल नहीं है. टीचर्स को पढ़ाना भी ठीक से नहीं आता है. अर्धज्ञान ही रहता है तो बच्चों को क्या पढ़ाएंगे? स्कूल का माहौल भी खराब है.

-नीरा त्रिपाठी

सरकारी स्कूल में पढ़ाई नहीं होने की जिम्मेदार सरकार की खराब नीतियां हैं. अगर सरकार अपना मैनेजमेंट सुधार ले तो पढ़ाई होने लगेगी.

-पंकज शर्मा

सरकारी अध्यापक जब अपने बच्चे को सरकारी विद्यालय में पढ़ाएंगे तो शिक्षा के स्तर में काफी बदलाव होगा. इससे लोग समझ सकेंगे कि वहां पर भी बढि़या एजुकेशन मिलती है.

-शेखर सिंह

गैर शैक्षणिक कार्य में ही सरकारी अध्यापक परेशान रहता है. इसीलिए वह सरकारी स्कूल में अपने बच्चों को नहीं पढ़ाता है. सरकारी शिक्षक को बहुउद्देश्यीय कर्मी बना दिया गया है.

-शिव सागर

सरकारी स्कूलों के अध्यापकों का वेतन काफी ज्यादा है फिर भी वे मन से पढ़ाते नहीं है, इसीलिए इन विद्यालयों में अपने बच्चों को नहीं पढ़ाते हैं.

-ओम प्रकाश मौर्या

सरकारी स्कूलों की टीचर अपने बच्चों को इन स्कूलों में इसलिए नहीं पढ़ाते हैं क्योंकि वे खुद जानते हैं अपने स्कूलों में शिक्षा का स्तर खराब है.

-मीतू