- ओडीओपी योजना को लागू करने वाला यूपी बना पहला राज्य

- 25 हजार करोड़ का होगा निवेश, सरकार करेगी लोन दिलाने में मदद

- 1006 करोड रुपये का लोन दिया गया 4095 लाभार्थियों को

- 1800-1800-888 टॉल फ्री नंबर भी किया गया जारी

- 04 एमओयू कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार ने किए साइन

ashok.mishra@inext.co.in

LUCKNOW: यूपी के बेरोजगार युवाओं के सपनों को पूरा करने के लिए योगी सरकार ने कमर कस ली है. शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मौजूदगी में प्रदेश सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना का शुभारंभ किया. योजना की मदद से प्रदेश के 25 लाख लोगों को पांच साल में रोजगार देकर स्वावलंबी बनाया जाएगा. इसमें करीब 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश भी प्रस्तावित है. इसकी शुरुआत राष्ट्रपति के हाथों 4095 लाभार्थियों को 1006.94 करोड़ के लोन बांटकर हुई. राष्ट्रपति ने जैसे ही बटन दबाया, लाभार्थियों के मोबाइल पर लोन अमाउंट ट्रांसफर होने का मैसेज गूंज उठा जिससे उनके चेहरे खिल गये. ध्यान रहे कि इस योजना की आधारशिला बीती 24 जनवरी को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू द्वारा राजधानी स्थित अवध शिल्प ग्राम में रखी गयी थी जिसे आज अमली जामा पहना दिया गया.

हर प्रोडक्ट को नई पहचान

राज्य सरकार इस योजना के तहत केवल लाभार्थियों को लोन और टूल किट ही नहीं बांट रही बल्कि उनके प्रोडक्ट की पैकेजिंग, मार्केटिंग और ब्रांडिंग में भी पूरा सहयोग करेगी. फिर चाहे लखनऊ का चिकन हो या फिर बरेली की जरदोजी, दुनिया भर में वह नई पहचान और कलेवर के साथ पेश होगा. इसके लिए कार्यक्रम में विप्रो जीई हेल्थकेयर, अमेजन इंडिया, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बांबे स्टॉक एक्सजेंच के साथ तीन एमओयू भी साइन किए गये. राज्यपाल राम नाईक ने ओडीओपी योजना पर बनी कॉफी टेबिल बुक का विमोचन किया. साथ ही लाभार्थियों की मदद को टॉल फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया. राष्ट्रपति ने इस अवसर पर ओडीओपी की वेबसाइट को भी लांच किया. तीन लाभार्थियों कानपुर के अतुल शर्मा को लेदर इंडस्ट्री के लिए 35 लाख, कन्नौज के मोइन खान को इत्र के व्यवसाय के लिए 7.25 लाख और लखनऊ के मोहित वर्मा को चिकनकारी के काम के लिए दस लाख रुपये के लोन की चेक अपने हाथों से दी. वहीं वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए इलाहाबाद के इकबाल अहमद, वाराणसी की नुसरत जहां और गोरखपुर के नागेंद्र प्रजापति ने इस योजना से हुए फायदे के बारे में बताया.

कोट

कोई भी हुनर या कौशल समाज के किसी वर्ग विशेष से जुड़ा नहीं होता है. सचमुच में परिश्रम, परिश्रम होता है. उसका कोई उच्च या निम्न स्तर नहीं होता. कम परिश्रम के व्यवसाय या नौकरी की ओर आकर्षित होने की अपनी मानसिकता को हमें बदलना होगा.

-रामनाथ कोविंद, राष्ट्रपति