-अत्यधिक वर्कलोड और पारिवारिक कलह के चलते बढ़ रहा पुलिस ऑफिसर्स में सुसाइड का ट्रेंड

-रिटायर्ड अधिकारी दे रहे वर्ककल्चर में बदलाव का सुझाव

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LUCKNOW :

केस: 1

तारीख: 29 मई, 2018

जगह: एटीएस मुख्यालय, लखनऊ

एंटी टेररिस्ट स्क्वायड में एडिशनल एसपी रहे राजेश साहनी रोज की तरह दफ्तर पहुंचे. गुमसुम दिख रहे साहनी काफी देर तक अपने केबिन में चुपचाप बैठे रहे. दोपहर करीब 12.45 बजे उन्होंने अपने ड्राइवर से कहा कि किसी ऑपरेशन में चलना है. इसके बाद उन्होंने उससे अपनी सर्विस पिस्टल मंगवाई. पिस्टल देने के बाद ड्राइवर कार में डीजल डलवाने चला गया. इसी बीच एएसपी साहनी ने खुद की कनपटी पर पिस्टल सटाकर फायर कर दिया. गोली चलने की आवाज सुनकर पहुंचे अन्य कर्मी जब तक उन्हें हॉस्पिटल ले जाते, उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया. पीपीएस अफसरों की मांग पर सरकार ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की, लेकिन सीबीआई ने जांच को टेकओवर नहीं किया. इधर, एडीजी जोन की जांच में सामने आया कि पारिवारिक कारणों की वजह से एएसपी साहनी ने सुसाइड किया.

केस: 2

तारीख: 5 सितंबर, 2018

जगह: कानपुर

कानपुर नगर में एसपी पूर्वी पद पर तैनात 2014 बैच के आईपीएस सुरेंद्र दास ने कैंट स्थित सरकारी आवास में जहरीला पदार्थ खा लिया. घर में मौजूद पत्नी डॉ. रवीना सिंह ने तबियत बिगड़ने पर स्टाफ ड्यूटी, परिवारीजन व कैंट पुलिस को सूचना दी. पुलिस की मदद से उन्हें उर्सला अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां से उन्हें एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया. वेंटीलेटर पर रखकर डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है. वहीं मुंबई के डॉक्टर्स को भी चार्टर्ड प्लेन से बुलाया गया, लेकिन उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई है. मामले की शुरुआती जांच के बाद एसपी पश्चिम संजीव सुमन ने बताया कि सुरेंद्र दास ने पारिवारिक कलह के चलते जान देने की कोशिश की है. पुलिस ने एसपी के कमरे से सुसाइड नोट भी बरामद किया जिसमें उन्होंने परिवारिक कलह के चलते सुसाइड करने की बात कही है.

यह दोनों घटनाएं यह बताने के लिये काफी हैं कि दूर से ग्लैमरस दिखने वाली यूपी पुलिस में अफसर की नौकरी की असल हकीकत क्या है. हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज व दिल की बीमारी से ग्रसित होने की खबरें अब पुरानी होने लगी हैं. अत्यधिक वर्कलोड और उसकी वजह से परिवार में होने वाली कलह पुलिस अफसरों को सुसाइड के लिये प्रेरित करती मालूम पड़ रही है. पुलिस अफसरों के बीच बढ़ रहे सुसाइड ट्रेंड ने शासन व सरकार को भी हलकान कर दिया है. हालांकि, विस्फोटक रूप धारण कर रही इस समस्या से निपटने के लिये आला अधिकारियों को कोई तरीका नहीं सूझ रहा.

नजर रखने की जरूरत

हाल ही में अधिकारियों के सुसाइड करने की कई घटनाएं सामने आई हैं. जिसका साफ मतलब है कि अधिकारियों के बीच तनाव के चलते अवसाद की समस्या आम हो रही है. यह तनाव वर्कलोड की वजह से हो सकता है या फिर पारिवारिक दिक्कतों की वजह से. या फिर इसके लिये दोनों ही कारण जिम्मेदार हो सकते हैं. यह समस्या विकराल रूप धारण करे इससे पहले नीति निर्माताओं को यह तय करना होगा कि अधिकारियों में घर करते तनाव को कम कैसे किया जाए. यहां यह भी बताना जरूरी है कि सुसाइड करने वाला शख्स पहले से इसके संकेत देता है. पहला बातों में, मसलन वह परिवारीजनों व मित्रों से बातचीत में जीवन से तंग आने, ऊब जाने जैसी बातें कहता है. जबकि, व्यवहार से संकेत देने वाला शख्स बेतरतीब ड्राइविंग, अत्यधिक नशा, बेटाइम खाना-पीना आदि. परिवारीजनों व मित्रों को ऐसे संकेत देने वालों पर नजर रखनी चाहिये और उन्हें तुरंत मनोचिकित्सक के पास लेकर जाना चाहिये. इलाज के बाद उसका डिप्रेशन दूर किया जा सकता है.

प्रो. एससी तिवारी

मनोचिकित्सक (रिटायर्ड)

केजीएमयू

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अहम बदलाव हों तभी बनेगी बात

पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों में सुसाइड का बढ़ता ट्रेंड बेहद चिंताजनक है. इसकी वजह भी साफ है. विभाग में 30 प्रतिशत से ज्यादा पद रिक्त हैं. जिसकी वजह से मौजूदा अधिकारियों व कर्मचारियों पर काम का अत्यधिक बोझ है. बावजूद इसके जब जनता से तिरस्कार, अधिकारियों से उपेक्षा, परिवार से असहयोग और राजनेताओं से असम्मान मिलता है तो पुलिस अधिकारी व कर्मचारी भीतर से टूट जाते हैं और डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं. वहीं, विभाग में न तो मनोचिकित्सक होते हैं और न ही किसी प्रकार की चिकित्सा सुविधा दी जाती है. अवकाश का भी कोई अता-पता नहीं रहता. ड्यूटी के घंटे भी निर्धारित नहीं होते. यह किसी भी फोर्स के लिये अच्छा संकेत नहीं है. अब समय आ गया है कि पुलिस विभाग में भी अहम बदलाव किये जायें. पैरामिलिट्री फोर्सेज की तरह यूपी पुलिस में भी मनोचिकित्सक की तैनाती हो, अवकाश अनिवार्य किया जाए और ड्यूटी के घंटे भी निर्धारित किये जाएं. ताकि, अधिकारी व कर्मचारी भी अपने परिवार को समय दे सकें और अपना सुख-दुख बांट सकें.

विक्रम सिंह

पूर्व डीजीपी

यूपी पुलिस

अन्य अधिकारी जिन्होंने लगाया मौत को गले

हरमिंदर राज सिंह, आईएएस

संजीव दुबे, आईएएस

विनोद राय, सीनियर पीसीएस

डा. वाईएस सचान, डिप्टी सीएमओ

पवन कुमार श्रीवास्तव, पूर्व डायरेक्टर स्वास्थ्य विभाग

सुनील वर्मा, परियोजना प्रबंधक, एनआरएचएम

सुनील यादव, डिप्टी सीएमओ