भाग गया संचालक
जब टीम ने छापा मारा, ऐन वक्त आराध्या हॉस्पिटल में कुशीनगर के रामपुर माफी निवासी मीना के सीजेरियन ऑपरेशन की तैयारी चल रही थी. स्वास्थ्य विभाग की टीम के पहुंचते ही संचालक चकमा देकर भाग गए. टीम ने तत्काल मीना को सीएचसी में एडमिट कराया. जहां उसका सफल ऑपरेशन किया गया. वहीं टीम की जांच में पाया गया कि नर्सिंग होम बिना किसी लाइसेंस के चल रहा था. मौके पर किसी तरह का कोई सर्टिफिकेट नहीं मिला. इसके बाद टीम ने अस्पताल को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी.

आशाओं का खेल
शासन ने गांव में आशाओं की तैनाती की है ताकि वे जरूरतमंद महिलाओं को सरकारी अस्पतालों तक पहुंचाएं. लेकिन इनमें से अधिकतर आशाएं चोरी-चुपके प्राइवेट हॉस्पिटल के लिए काम कर रही हैं. ये गांव की प्रेगनेंट महिलाओं व उनके परिवार को बहला-फुसलाकर प्राइवेट हॉस्पिटल में पहुंचा देती हैं. ऐसे हॉस्पिटल जहां बगैर डिग्री वाले डॉक्टर होते हैं तो बगैर लाइसेंस वाला अस्पताल. ऐसे में इलाज भी वैसा ही होता है. सिर्फ कमीशन के चक्कर में आशाएं लोगों की जान से खेल रही हैं. साथ ही इन क्लिनिक के भी तमाम दलाल हैं जिन्हें पेशेंट्स के एडमिट कराने पर कमिशन मिलता है. यही कारण है कि तमाम कार्रवाई के बाद भी ऐसे नर्सिंग होम्स फल फूल रहे हैं.

सीएमओ के आदेश पर टीम ने कार्रवाई की. इस दौरान आराध्या हॉस्पिटल में जरूरी कागजात नहीं पाए जाने पर उसे सील कर दिया गया है. अभियान चलाकर अवैध रूप से संचालित हॉस्पिटल पर कार्रवाई की जाएगी.
- डॉ. एसके पांडेय, एसीएमओ