कानपुर। 1926 में जन्में लेजेंड्री सिंगर कंपोजर हजारिका जी आज हमारे बीच नहीं हैं पर उनके द्वारा कंपोज किए गए बॉलीवुड संगीत आज भी लोग गुनगुनाते हैं। भूपेन हजारिका के सॉन्ग 'गुलाबी आंखे', 'दिल हूम-हूम करे' जैसे गानों से फैंस के दिल पर अपनी छाप छोड़ने वाले हजारिका ने महज 12 वर्ष की उम्र में अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था। उन्होंने इंडस्ट्री में अपना पहला गाना 'बिसवा बिजॉय नो जोवन' 12 साल की उम्र में गाया था। ये गाना असम की एक फिल्म 'इंद्मालती' का है। हजारिका मल्टीटैलेंटेड व्यक्ति थे, वो डायरेक्टर, राइटर, सिंगर और म्युजिक कंपोजर भी थे।  

हजारिका के अर्चीवमेंट्स
1956 में हजारिका ने डायरेक्शन के क्षेत्र में अपना पहला कदम फिल्म 'एरा बतर सुर' से किया था। हजारिका बॉलीवुड में नॉर्थ इस्ट क्षेत्र की आवाज बने थे। हजारिका की वजह से ही अरुनाचल प्रदेश में कलर फिल्मों की शुरुआत हुई है। साल 1977 में फिल्म 'मेरा धर्म मेरी मां' से अरुनाचल में हजारिका ने कलर फिल्मों की शुरुआत की थी। हजारिका ने कई बार नेशनल स्टेज पर शानदार म्युजिकल परफॉर्मेंस भी दी है। बाद में हजारिका ने हिंदी फिल्म 'एक पल' को कई अवॉर्ड जिताने में अपना संगीत दे कर सहायता की थी।

हजारिका ने टीवी सीरियल्स में किया काम
हजारिका ने सिर्फ बडे़ पर्दे ही नहीं छोटे पर्दे पर भी अपनी कला का प्रदर्शन किया है। हजारिका ने बेहद पॉपुलर टीवी सीरियल 'लोहित किनारे' में अपना संगीत दिया था जिसे कल्पना लाजमी जी ने डायरेक्ट किया था। कहा जाता है कि हजारिका और कल्पना लाजमी कभी लिव इन रिलेशनशिप में भी रहे हैं पर इस बात में कितनी सच्चाई है ये कह पाना मुश्किल है। इन्होंने फिल्म 'रुदाली' का म्युजिक भी कंपोज किया। 1992 में उन्हें दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से भी नवाजा गया था। इसके अलावा इन्होंने कई बार नेशनल अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है। महज 85 की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है।

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