सीता नवमी पर व्रत रख पूजन करें
हिन्दू समाज में जिस प्रकार श्रीरामनवमी का माहात्म्य है, उसी प्रकार जानकी नवमी का भी है ।  वैष्णवों के मतानुसार वैशाख शुक्ल नवमी को भगवती जानकी का प्रादुर्भाव हुआ था। अतएव इस दिन व्रत रहकर उनका जन्मोत्सव तथा पूजन करना चाहिये। जो इस वर्ष सोमवार 13 मई को पड़ रही है। हिन्दू मात्र के परमाराध्य सीता जी के आविर्भाव का ये दिवस अति पावन एवं महत्वपूर्ण है।

इस पर्व पर व्रत रखने वाले को मिलते हैं ये फल

श्रीजानकीनवमी के पावन पर्व पर जो व्रत रखता है तथा भगवान् श्रीरामचन्द्रसहित भगवती सीता का अपनी शक्ति के अनुसार भक्तिभाव पूर्वक विधि विधान से सोत्साह पूजन वन्दन करता है, उसे  पृथ्वी दान का फल और सर्वभूत-दया का फल, अखिल तीर्थ- भ्रमण का फल अनायास ही मिल जाता है। भगवती श्रीसीताकी प्रसन्नता समस्त मंगलों का मूल है। अत: श्रीसीतानवमी -व्रत आत्मकल्याणार्थी के लिए सर्वथा आचरणीय है।

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हल की नोक को भी कहते हैं 'सीता'
वैशाख मास की शुक्ल नवमी को जबकि पुष्य नक्षत्र था, मंगल के दिन सन्तान-प्राप्ति की कामना से यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए राजा जनक हल से भूमि जोत रहे थे, उसी समय पृथ्वी से उक्त देवी का प्राकट्य हुआ। जोती हुई भूमि को तथा हल की नोक को भी 'सीता' कहते हैं । अत: प्रादुर्भूता भगवती विश्व में सीता नाम से विख्यात हुई। इसी नवमी की पावन तिथि को भगवती सीता का प्राकट्योत्सव मनाया जाता है।

ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र