- 25 और 26 अप्रैल के बाद मनडे को फिर आया भूकंप, करीब 40 सेकेंड तक पूरे शहर में महसूस किए गए झटके

- घरों-अपार्टमेंट से निकलकर पार्को और मैदानों की तरफ भागे लोग, महिलाएं-बच्चे डर के मारे रोने लगे

- काफी देर तक अपने घरों को वापस नहीं लौटे लोग, मौसम विभाग के अनुसार फिर आ सकते हैं झटके

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यन्हृक्कक्त्र : भूकंप ने एक बार फिर सबको दहला दिया. दोपहर करीब 12 बजकर 35 मिनट पर लगातार 40 सेकेंड तक भूकंप के झटके शहर में महसूस किए गए. भूकंप आते ही घर, अपार्टमेंट व ऑफिस खाली हो गए. हर तरफ भागो-भागो, भूकंप आया.. की तेज आवाजें गूंजने लगीं. डर और दहशत के कारण महिलाएं व बच्चे रोने लगे. बड़े-बुजुर्ग बैचेन हो उठे. ट्रैफिक भी कुछ देर के लिए थम गया. काफी देर तक शहर के लगभग सभी छोटे-बड़े पार्को और मैदानों में लोगों का जमावड़ा लगा रहा. मोबाइल नेटवर्क भी धड़ाम हो गया. सभी हाथ जोड़कर ऊपर वाले से अपनी और घरवालों की सलामती की दुआ मांगता नजर आया. आईआईटी की रिपोर्ट के अनुसार देर शाम तक कुल 7 झटके शहर में आए हैं.

15 दिन में तीसरा बड़ा झटका

बीते 15 दिनों में ट्यूजडे को तीसरा मौका था जब भूकंप ने शहर को हिलाकर रख दिया. घर, ऑफिस, अपार्टमेंट, हॉस्पिटल, फैक्ट्रियों में भूकंप के झटके लगते ही अफरा-तफरी मच गई. महिलाएं, बच्चे, बूढ़े व बुजुर्ग अपने-अपने घरों से बाहर की तरफ भागने लगे. तीसरी बार धरती डोलने से बच्चे रोते हुए अपनी माओं के कलेजे से चिपक गए. अपने-अपने घरों के बाहर खड़े बड़े-बुजुर्ग भी बैचेन दिखे. लिफ्ट बंद होने पर मल्टीस्टोरी बिल्डिंगों में रहने वाले (खासकर टॉप फ्लोर) लोगों को सीढि़यों से भागते हुए नीचे उतरना पड़ा. इससे कई लोगों का दम फूलने लगा.

पार्को-मैदान में जबर्दस्त भीड़

जान बचाने के लिए शहर के ज्यादातर खुले स्थान व पार्को में बड़ी संख्या में लोग अपने फैमिली मेम्बर्स के साथ नजर आए. फूलबाग, नानाराव पार्क, मोतीझील, बृजेन्द्र स्वरूप पार्क, सीएसए व यूनिवर्सिटी ग्राउंड में देखते ही देखते लोगों की भीड़ इकट्ठा होने लगी. ग्राउंड्स महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गो से पटे नजर आए. वहीं गंगा बैराज, बिठूर, सरसैय्या समेत अन्य गंगा घाटों में भी लोग सुरक्षा के लिहाज से डटे रहे. सबको यही डर लग रहा था कि कहीं फिर से भूकम्प न आ जाए. इसलिए करीब एक से डेढ़ घंटे बाद तक लोग अपने घरों के बाहर ही रहे.

मोबाइल नेटवर्क धड़ाम

भूकंप आने के चंद सेकेंड के अंदर-अंदर मोबाइल नेटवर्क धड़ाम हो गया. इस कारण अपने सगे-संबंधियों का हालचाल लेने के लिए लोगों ने जब फोन लगाना शुरू किया तो किसी का भी फोन नहीं लग रहा था. करीब डेढ़ घंटे बाद मोबाइल नेटवर्क सेवाएं सामान्य हो सकीं, जिसके बाद लोगों ने अपने-अपने घरों में फोन करके परिजनों का हालचाल पूछा. किसी तरह की जान-माल की हानि न होने की खबर सुनने के बाद सबने राहत की सांस ली.

आईआईटी रिपोर्ट के अनुसार कानपुर में देर शाम तक सात झटके महसूस किए गए. भूकम्प की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर कुछ इस कदर रही -

भूकंप का झटका रिक्टर पैमाने पर तीव्रता

पहला 7.2 मैग्नीट्यूड

दूसरा 5.4 मैग्नीट्यूड

तीसरा 6.3 मैग्नीट्यूड

चौथा 5.2 मैग्नीट्यूड

पांचवां 4.8 मैग्नीट्यूड

छठवां 5.0 मैग्नीट्यूड

सातवां 4.8 मैग्नीट्यूड

डर के साथ सेफ्टी अवेयरनेस भी दिखी

अप्रैल में 25 और 26 तारीख को जब भूकंप आया था तो डर, दहशत और खौफ का जबर्दस्त आलम था. हालांकि, 15 दिनों बाद आए भूकंप से निपटने के लिए लोगों में सेफ्टी अवेयरनेस भी दिखी. झटके लगते ही लोग अपनी जगह से उठे और तेज कदमों के साथ बाहर की तरफ दौड़ लगा दी.

पेशेंट्स भी बाहर भागे

भूकंप के असर से शहर के अस्पताल भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके. हालत यह थी कि एकाएक भूकंप आने की वजह से मरीजों के साथ तीमारदारों को भी तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ा. एडमिट पेशेंट्स भी घबड़ाकर निकल आए. वहीं प्राइवेट नर्सिग होम में भर्ती मेल-फीमेल पेशेंट्स के हाथों में वीगो लगी थी, लेकिन जैसे ही भूकंप के झटके आए तो मरीज हाथ में वीगो लगाकर तीमारदार के साथ काफी देर तक बाहर बैठे नजर आए.