- दो-दो मिनट बोलकर अपनी समस्या रखी थी पार्षदों ने

- उम्मीद थी कि समस्याओं का निस्तारण होगा, नतीजा सिफर

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LUCKNOW आठ माह के लंबे इंतजार के बाद आयोजित हुए सदन में पार्षदों की ओर से अपने-अपने वार्ड में व्याप्त समस्याओं को रखा गया. उन्हें उम्मीद थी कि सदन में उनकी समस्याओं के निस्तारण के लिए रणनीति बनेगी लेकिन नतीजा सिफर रहा. एक बार फिर पार्षद समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन लेकर लौट गए.

मूलभूत समस्याएं

पार्षदों की ओर से सदन में जो भी समस्याएं रखी गई, वे आम जनता से जुड़ी थीं. इन समस्याओं में ग्यारह बिंदु प्रमुख रूप से शामिल थे. यह बात सही है कि हर वार्ड में जलभराव, बदहाल सड़क, खस्ताहाल पार्क और मार्ग प्रकाश व्यवस्था, आवारा जानवर, पेयजल संकट आदि की समस्या है. जिससे जनता परेशान है. इसकी शिकायत पार्षदों ने कई बार लिखित में निगम प्रशासन से की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. इसके बाद सभी 110 वार्ड के पार्षद सदन का इंतजार कर रहे थे, जिससे वे अपने-अपने वार्ड में व्याप्त समस्याओं को दूर करा सकें.

मिलेगा जवाब, धैर्य रखें..

सदन के दौरान अपनी समस्या रखने के बाद हर पार्षद ने मेयर और नगर आयुक्त से यही मांग रखी कि उनकी समस्या को लेकर जवाब दिए जाएं. इस पर उन्हें जवाब दिया गया कि पहले आप लोग समस्याएं बताएं, सदन के अंतिम चरण में आपका जवाब दिया जाएगा. चूंकि सदन के अंत में ईईएसएल और ईकोग्रीन को लेकर हंगामा हुआ, जिससे पार्षदों के सवालों के जरूरी जवाब नहीं मिल सके. जिससे पार्षद नाराज भी नजर आए और कई पार्षदों ने तो यहां तक कह दिया कि सदन में आने का कोई फायदा नहीं है.

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कब होगा विकास

करीब 80 फीसदी पार्षदों की ओर से सड़क-नाली निर्माण को लेकर सवाल किए गए थे. पार्षदों ने मांग उठाई थी कि आखिर अवस्थापना या अन्य मद से कितने निर्माण हुए, इसकी लिस्ट दी जाए. जिससे यह पता चल सके कि शहर में कितना विकास हुआ है. हालांकि इस सवाल का जवाब भी सामने नहीं आ सका. पार्षदों ने यहां तक कह दिया कि अगले साल लोक सभा चुनाव हैं, इसके मद्देनजर अगले वर्ष किसी वक्त भी आचार संहिता लागू हो जाएगी. ऐसे में वार्डो में कोई निर्माण नहीं हो सकेगा. जरूरी है कि जल्द से जल्द निर्माण कार्यो से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया पूर्ण की जाए.