GORAKHPUR:

शहर में जालसाजों ने ठगी का नया तरीका खोज निकाला है. हर बैंक एकाउंट को आधार नंबर से लिंक कराने की योजना के बहाने जालसाज लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं. हाल के दिनों में आधार कार्ड का नंबर लिंक कराने और वेरीफिकेशन कराने का झांसा देकर जालसाजों ने छह से अधिक लोगों को चूना लगा दिया. आधार कार्ड के नाम पर ठगे गए पीडि़तों की तहरीर पर पुलिस जांच में जुटी है.

साइबर सेल से जुड़े पुलिस कर्मचारियों का कहना है कि जालसाजों के झांसे में आकर लोग अपनी गाढ़ी पूंजी गंवा रहे हैं. बैंक के नाम पर आने वाली ऐसी कॉल से बचने की जरूरत है. इसके पहले जालसाज एटीएम कार्ड ब्लाक होने के बहाने आनलाइन ट्रांजेक्शन करते थे.

केस एक

07 अक्टूबर को कैंपियरगंज एरिया के सोनौरा बुजुर्ग निवासी कंडक्टर को किसी ने फोन किया. उसने को बैंक अधिकारी बताते हुए आधार कार्ड नंबर न लिंक कराने पर एकाउंट बंद करने की चेतावनी दी. इससे घबराकर कंडक्टर अपनी पूरी डिटेल बताता चला गया. पूरी जानकारी लेकर जालसाजों ने 60 हजार रुपए का ट्रांजेक्शन कर लिया. मोबाइल पर मैसेज आने पर उनको जानकारी हुई तो वह थाना पहुंचा.

केस दो

08 अक्टूबर को सहजनवां की इसरावती के मोबाइल पर किसी ने फोन किया. उसने आधार के संबंध में जानकारी मांगी तो महिला हड़बड़ा गई. आधार कार्ड लिंक कराने का झांसा देकर फोन करने वाले वन टाइम पासवर्ड जान लिया. सोमवार को वह इसरावती बैंक गई तो उसे रुपए निकालने की जानकारी हुई. तब से वह परेशान होकर थाने का चक्कर लगा रही है.


फैक्ट फिगर

आधार नंबर को बैंक एकाउंट से लिंक कराना अनिवार्य

50 हजार रुपए या उससे ऊपर के लेनदेन पर आधार नंबर जरूरी

गोरखपुर में जनवरी से सितंबर तक कुल शिकायतें- 91

जिले में हर माह आने वाली शिकायतें करीब - 10 से 12

थानों में साइबर क्राइम दर्ज होने वाले मुकदमे औसतन - 07 से 08


ऐसे बना रहे ठगी के शिकार

ऑनलाइन फ्राड करने वाले फोन कर लोगों को उनके आधार नंबर से बैंक एकाउंट को लिंक कराने की बात कह रहे हैं. अगर किसी ने यह कह दिया कि उनका बैंक एकाउंट आधार से लिंक हो चुका है तो उसे वेरीफिकेशन का झांसा दिया जा रहा है. एटीएम कार्ड का नंबर, आधार कार्ड का नंबर पूछकर जालसाज वन टाइम पासवर्ड मांग ले रहे हैं. वन टाइम पासवर्ड मिलते ही आन फ्राड करने वाले नकदी का ट्रांजेक्शन कर देते हैं.

सावधानी बरतकर कर सकते बचाव

ऑनलाइन फ्राड के मामलों में बमुश्किल कार्रवाई हो पाती है. इसलिए पुलिस केस दर्ज करने से बचती है. मुकदमा दर्ज करने के बाद इस मामले में जांच चलती रहती है. पुलिस से जुड़े लोगों का कहना है कि 24 घंटे के भीतर शिकायत दर्ज कराने पर ट्रांजेक्शन किए गए अमाउंट की कुछ रिकवरी हो सकती है. लेकिन ज्यादातर मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हो पाती. क्योंकि दूर दराज इलाकों में बैठे जालसाज आनलाइन पूरा गिरोह चला रहे हैं.

इस तरह से कर सकते हैं बचाव

बैंक की ओर से किसी ग्राहक को कोई कॉल नहीं की जाती है.

किसी तरह की असुविधा होने पर बैंक की ब्रांच से संपर्क करें.

फोन पर आधार कार्ड-एकाउंट लिंक कराने वालों से बचें.

अंजान काल पर किसी तरह की कोई गोपनीय जानकारी न दें.

साइबर कैफे से आनलाइन बैंकिंग सेवा का इस्तेमाल करने से परहेज करें.

आनलाइन बैंकिंग, एटीएम कार्ड का पासवर्ड हमेशा बदलते रहें.

किसी तरह की काल आने पर हड़बड़ी में कोई सूचना न दें.

हाल के दिनों में आधार कार्ड लिंक कराने के बहाने जालसाज लोगों को फोन कर रहे हैं. हड़बड़ी में कई लोग जालसाजों को अपने आधार कार्ड का नंबर, एटीएम कार्ड का नंबर, पिन सहित कई जानकारियां दे देते हैं. इसका फायदा उठाकर जालसाज ठगी कर ले रहे हैं. आधार कार्ड नंबर के आधार पर बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों को जागरूकता कार्यक्रम चलाने के लिए निर्देश दिए गए हैं.

मोहित अग्रवाल, आईजी