मुंबर्इ (पीटीआर्इ)। एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ एक तिहार्इ भारतीय ही रिटायरमेंट के लिए नियमित बचत करते हैं। दुनियाभर में कामकाजी उम्र के सिर्फ 33 फीसदी लोग अपनी उम्र के अंतिम दिनों के लिए कुछ न कुछ अलग से रखते हैं। एचएसबीसी की एक रिपोर्ट 'फ्यूचर आॅफ रिटायरमेंट : ब्रिजिंग द गैप' के अनुसार, कम जानकारी की वजह से लोग रिटायरमेंट के बाद जिंदगी काटने के लिए बचत नहीं कर पाते हैं। दरअसल उन्हें पता ही नहीं होता कि उनके उम्र के अंतिम पड़ाव पर उन्हें जिंदगी बिताने के लिए कितनी जरूरत पड़ेगी।

रिटायरमेंट को मानते थे बची-खुशी जिंदगी
एचएसबीसी इंडिया के रिटेल बैंकिंग आैर वेल्थ मैनेजमेंट प्रमुख रामाकृष्णन एस ने कहा कि अभी तक लोग रिटायरमेंट को बची-खुची जिंदगी मानते थे। उनमें एेसी भावना थी कि सेवा निवृत्ति के बाद का जीवन किसी न किसी प्रकार कट ही जाएगा। लेकिन अब लोग रिटायरमेंट के बाद जीवन के बचे समय को लेकर सजग हो गए हैं आैर इसे लंबा आैर खुशनुमा बनाने के लिए प्रयास करने लगे हैं। इन सबके के लिए वजह भी है क्योंकि 65 की उम्र में हमारी जरूरतें बहुत अलग होंगी। इसी प्रकार 75 या 85 साल की उम्र की अनुमानित जरूरतों में आैर वित्तीय बदलाव देखने को मिल सकता है।

बीमारी में देखभाल के लिए भी बचत नहीं
यह रिसर्च एचएसबीसी की आेर से इपसाॅस ने आॅनलाइन कराया था। इसमें आॅस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, कनाडा, चीन, मलेशिया, मैक्सिको, सिंगापुर, ताइवान, फ्रांस, हांगकांग, भारत इंडोनेशिया, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, यूके आैर अमेरिका के 16 बाजारों के 16 हजार वयस्क शामिल किए गए थे। इसमें खुलासा हुआ है कि कामकाजी लोगों में से सिर्फ 19 प्रतिशत लोग भविष्य में बीमारी होने की हालत में घर पर देखभाल के लिए बचत करते हैं। यह उन लोगों का भी सिर्फ आधा (51 प्रतिशत) ही है जो यह दावा करते हैं कि वे रिटायरमेंट के बाद घर पर सुकून से रहने के लिए निवेश कर रहे हैं।

वर्तमान को जीने में करते हैं भरपूर खर्च
रिपोर्ट में यह पाया गया है कि कामकाजी लोगों में से तकरीबन आधे लोग (56 प्रतिशत) डेे-टू-डे आधार पर जीवन यापन करते हैं। बाकी के 53 प्रतिशत लोग छोटी अवधि में जरूरतों को ध्यान में रखकर बचत करते हैं। कामकाजी लोगों में से लगभग आधे लोगों (45 प्रतिशत) ने माना कि वे भविष्य के लिए बचत करने की बजाए वर्तमान जीवन को जीने में भरपूर खर्च करते हैं। इसमें कहा गया है कि कामकाजी लोगों की दो तिहार्इ संख्या (69 प्रतिशत) रिटायरमेंट को ध्यान में रखकर कोर्इ बचत नहीं करती। कुछ लोग (54 प्रतिशत) ये मानते हैं कि रिटायरमेंट के बाद जीवनयापन के लिए वे कोर्इ धंधा या नया काम शुरू कर देंगे।

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