क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : झार2ांड विकास मोर्चा से बीजेपी में शामिल हुए छह विधायकों के दलबदल मामले की सुनवाई करते हुए स्पीकर प्रो. दिनेश उरांव की कोर्ट ने एक बार फिर प्रतिवादी पक्ष 5ाजपा को 2ारी2ाोटी सुनाई है. पिछली सुनवाई में स्पीकर ने प्रतिवादी पक्ष को हर तिथि को हर विधायक की ओर से कम से कम एक-एक गवाह पेश करने को कहा था. लेकिन, शुक्रवार को विधायक आलोक चौरसिया की ओर से सिर्फ एक गवाह विनोद कुमार पेश हुए. स्पीकर ने इसपर नाराजगी जाहिर करते हुए 22 दिसंबर को स5ाी छह गवाहों का शपथपत्र दायर करने को कहा. प्रतिवादी पक्ष के अधिव1ताओं ने सुनवाई की तिथि आगे बढ़ाने की गुजारिश की, जिसे स्पीकर ने 2ारिज कर दिया.

नोटिस जारी करने का अनुरोध

प्रतिवादी पक्ष के अधिव1ताओं ने समय का हवाला देते हुए हर तिथि को छह गवाहों को लाने में असमर्थता जताई तथा संबंधित गवाहों को नोटिस जारी करने का कोर्ट से अनुरोध किया. इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यही वजह रही कि कोर्ट ने 78 गवाहों की 5ारी 5ारकम सूची को छोटा करने को प्रतिवादी पक्ष को कहा था. इसके बाद प्रतिवादी पक्ष के द्वारा सात गवाहों की सूची दी गई. छह अधिव1ताओं को जोड़कर यह सूची 13 होती है. कोर्ट ने उसी समय स्पष्ट कर दिया था कि अब 13 गवाहों की ही गवाही होगी और हर तिथि को छह गवाह पेश किए जाएं, जिसकी अवहेलना की गई.

चुनाव तक मामले को उलझाने की साजिश

झाविमो के अधिव1ता राजनंदन सहाय ने एम वेंकैया नायडू की ओर से शरद यादव के मामले में दिए गए फैसले की ओर कोर्ट का ध्यान आकृष्ट कराया गया. उन्होंने कहा कि ऐसे मामले में उन्होंने तीन महीने के अंदर फैसला करने की बात कही थी. उन्होंने कहा कि प्रतिवादी पक्ष जानबूझकर गवाह पेश नहीं कर रहा है, ताकि चुनाव आने तक मामला उलझा रहे.